Publish Date: Tue, 23 Sep 2025 (11:10 IST)
Updated Date: Tue, 23 Sep 2025 (11:19 IST)
माता चंद्रघंटा का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। माता के तीन नैत्र और दस हाथ हैं। इनके कर-कमल गदा, बाण, धनुष, त्रिशूल, खड्ग, खप्पर, चक्र और अस्त्र-शस्त्र हैं, अग्नि जैसे वर्ण वाली, ज्ञान से जगमगाने वाली दीप्तिमान देवी हैं चंद्रघंटा। ये शेर पर आरूढ़ है तथा युद्ध में लड़ने के लिए उन्मुख है।
कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार जब दैत्यों का आतंक बढ़ने लगा था। उस काल में महिषासुर का भयंकर युद्ध देवताओं से हो रहा था। महिषासुर देवराज देवलोक को अपने कब्जे में लेना चाहता था। जब देवताओं को उसकी इस इच्छा का पता चला तो वे विचलिता हो गए। सभी देवता भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समक्ष पहुंचे। ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने देवताओं की बात सुन क्रोध प्रकट किया।
मां चंद्रघंटा पूजा विधि-
- नवरात्रि में तीसरे दिन देवी मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व है।
- देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालुओं को भूरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए।
- मां चंद्रघंटा को अपना वाहन सिंह बहुत प्रिय है और इसीलिए गोल्डन रंग के कपड़े पहनना भी शुभ है।
- तृतीया के दिन भगवती की पूजा में दूध की प्रधानता होनी चाहिए।
- पूजन के उपरांत वह दूध ब्राह्मण को देना उचित माना जाता है।
- इस दिन सिंदूर लगाने का भी रिवाज है।
मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
प्रार्थना:
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नसस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
मां चंद्रघंटा का भोग- आज के दिन मां सफेद चीज का भोग जैसे दूध या खीर का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा माता चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाया जाता है।
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WD Feature Desk
Publish Date: Tue, 23 Sep 2025 (11:10 IST)
Updated Date: Tue, 23 Sep 2025 (11:19 IST)