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(पंचमी तिथि)
  • तिथि: भाद्रपद शुक्‍ल पंचमी
  • त्योहार/व्रत/मुहूर्त: श्री बलराम जन्‍मोत्‍सव
  • अभिजीत मुहूर्त: आज कोई मुहूर्त नहीं है।
  • राहुकाल: दोपहर 12:33 से 02:05 तक।
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: 9 दिनों में किस देवी की करें पूजा? जानें हर दिन का महत्व और लाभ

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Ashadha gupt navratri das mahavidya puja mantra
गुप्त नवरात्रि के दौरान, जहाँ सामान्य गृहस्थ लोग मां दुर्गा के नौ सौम्य स्वरूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी आदि) की आराधना करते हैं, वहीं तांत्रिक और साधक 10 महाविद्याओं (दस महान शक्तिशाली तांत्रिक देवियों) की गुप्त रूप से कठिन साधना करते हैं। प्रतिपदा (पहले दिन) से लेकर नवमी (नौवें दिन) तक दस महाविद्याओं की पूजा का दिनवार क्रम और उनका स्वरूप इस प्रकार है।

1. पहला दिन (प्रतिपदा): मां काली-

पूजा लाभ: सभी प्रकार के संकटों, शत्रुओं और शनि दोष से मुक्ति के लिए।
मंत्र: ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा:।
सरल मंत्र: ॐ क्रीं कालिकायै नम:।
भोग: घर का बना शुद्ध सूजी का हलवा, पूरी और उबले हुए काले चने, उड़द की दाल से बने व्यंजन, नींबू, और शराब।
फूल: माँ काली को गुड़हल, लाल और नीले रंग के फूल पसंद हैं।
 

2. दूसरा दिन (द्वितीया): मां तारा-

पूजा लाभ: तीव्र बुद्धि, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए।
मंत्र: ऐं ऊँ ह्रीं क्रीं हूं फट्।
भोग: भोग: सफेद रंग के पेड़े, रसगुल्ले, गाढ़ा किया हुआ गाय का दूध, गुड़, मखाना, खीर और नारियल।
फूल: इन्हें नीलकमल और श्वेत पुष्प पसंद हैं।

3. तीसरा दिन (तृतीया): मां त्रिपुर सुंदरी (ललिता/षोडशी)-

पूजा लाभ: ऐश्वर्य, सौंदर्य, निखरे रूप और सुखी दांपत्य जीवन के लिए।
मंत्र: श्री ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं क्रीं कए इल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।
सरल मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरायै नम:।
भोग: पंचामृत, पंचमेवा, सूजी का हलवा, मीठी खीर, फलों के रस और शुद्ध घी के मिष्ठान।
फूल: माँ ललिता को गुलाब और चमेली के फूल पसंद हैं।

4. चौथा दिन (चतुर्थी): मां भुवनेश्वरी-

पूजा लाभ: भूमि, भवन, भौतिक सुख और चंद्रमा जनित दोषों की शांति के लिए।
मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौ: भुवनेश्वर्ये नम: या ह्रीं।
सरल मंत्र: ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नम:।
भोग: केसर युक्त खीर और मावे के पेड़े, पंचमेवा और दूध से बनी मिठाई।
फूल: इस माता को लाल गुड़हल, कमल और सुगंधित पीले पुष्प पसंद हैं।

5. पांचवां दिन (पंचमी): मां त्रिपुर भैरवी-

पूजा लाभ: तंत्र बाधा, नजर दोष और भूत-प्रेत आदि के भय को नष्ट करने के लिए।
मंत्र: ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा।
सरल मंत्र: ह स: हसकरी हसे।'
भोग: मीठी पूरी या गुड़ से बनी खीर, उड़द की बनी सामग्री, तीखे और नमकीन व्यंजन।
फूल: इन्हें लाल रंग के फूल और लाल कनेर बहुत पसंद हैं।
 

6. छठा दिन (षष्ठी): मां छिन्नमस्ता-

पूजा लाभ: कोर्ट-कचहरी, मुकदमे में विजय, राहु दोष मुक्ति और तीव्र वशीकरण के लिए।
मंत्र: श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा:।
भोग: मालपुआ या उड़द की दाल की कचौरी, लाल फल और लाल मिठाई।
फूल: माँ भैरवी को गेंदा और कनेर के फूल पसंद हैं।

 
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7. सातवां दिन (सप्तमी): मां धूमावती-

पूजा लाभ: दरिद्रता, रोग, शोक और जीवन के सभी दुखों के नाश के लिए।
मंत्र: धूं धूं धूमावती ठ: ठ:।
भोग: उड़द दाल के वड़े, कचौरी या भुने हुए चने, नमकीन और तीखे खाद्य पदार्थ, बेसन के पकोड़े, और काले चने।
फूल: इन्हें सूखे फूल, अपराजिता और अमलतास के फूल पसंद हैं।

8. आठवां दिन (अष्टमी): मां बगलामुखी-

पूजा लाभ: शत्रुओं के स्तंभन (वाणी व बुद्धि रोकने), वाद-विवाद में जीत और मंगल दोष के लिए।
मंत्र: ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिव्हा कीलय, बुद्धिं विनाश्य ह्रीं ॐ स्वाहा।
भोग: केसरिया भात, बेसन के लड्डू या कढ़ी, पीले रंग के मिष्ठान, बेसन से बनी चीजें और केसर।
फूल: माँ पीतांबरा को पीले रंग के फूल, जैसे पीला गेंदा या पीला कनेर पसंद हैं।

9. नौवां दिन (नवमी): मां मातंगी-

पूजा लाभ: कला, संगीत, गृहस्थ सुख और आकर्षण शक्ति बढ़ाने के लिए।
मंत्र: ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी फट् स्वाहा।
भोग: मीठा गुड़ भात, दही-भात, विभिन्न प्रकार के अन्न, फल, खीर और घर में बना सात्विक भोजन।
फूल:माँ मातंगी को पलाश, चमेली के पुष्प और बेलपत्र पसंद हैं।

9. नौवां दिन (नवमी): मां कमला-

पूजा लाभ: अटूट धन-धान्य, समृद्धि, वैभव और लक्ष्मी कृपा पाने के लिए।
मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।
सरल मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमलायै नम:।
भोग: मखाने की खीर, मिश्री-मावा या नारियल की बर्फी, शहद, मखाने और सफेद मिष्ठान।
फूल: इन्हें गुलाबी और लाल कमल पसंद हैं।
 
विशेष बात: चूंकि महाविद्याएं 10 हैं और नवरात्रि के दिन 9 होते हैं, इसलिए नवमी तिथि (नौवें दिन) को दो देवियों—मां मातंगी और मां कमला की साधना एक साथ या अलग-अलग पहर में करने का विधान है।
 
सावधानी: यह साधनाएं अत्यंत उग्र और शक्तिशाली मानी जाती हैं, इसलिए गृहस्थ जीवन वाले लोग इनका मानसिक और सात्विक रूप से ही पूजन करते हैं, जबकि तांत्रिक रात के समय (निशीथ काल) में इनकी गुप्त साधना करते हैं।
 

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