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आज के शुभ मुहूर्त

(गुप्त नवरात्रि नवमी)
  • तिथि- आषाढ़ शुक्ल नवमी
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 से 12:56 तक
  • त्योहार/व्रत/मुहूर्त- गुप्त नवरात्रि नवमी, भड़ली नवमी
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 02:03 से 03:45 तक
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मोक्ष या भौतिक सुख? जानें आषाढ़ और माघ गुप्त नवरात्रि की साधना में क्या है बुनियादी अंतर

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Ma kalika: ashad or magh navratri
सनातन धर्म में साल में कुल चार बार नवरात्र आते हैं। इनमें से दो प्रकट नवरात्र होते हैं- चैत्र और शारदीय, जिन्हें गृहस्थ लोग धूमधाम से मनाते हैं। बाकी दो गुप्त नवरात्र होते हैं जो आषाढ़ (मानसून की शुरुआत में) और दूसरी माघ (सर्दियों के अंत में) के महीने में आते हैं। दोनों ही गुप्त नवरात्र तंत्र साधना, शाक्त संप्रदाय और कठिन अनुष्ठानों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इनके समय, उद्देश्य और साधना की प्रकृति में कुछ गहरे अंतर हैं।
 

1. ऋतु और ऊर्जा का अंतर:

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष (आमतौर पर जून-जुलाई) में आती है। यह ग्रीष्म ऋतु के अंत और वर्षा ऋतु के आगमन का संधिकाल होता है। इस समय प्रकृति में भारी बदलाव, उमस और तीव्र ऊर्जा होती है। यह समय ब्रह्मांडीय शक्तियों को सक्रिय करने और प्रकृति की प्रचंड ऊर्जा से जुड़ने का होता है।
 
माघ गुप्त नवरात्रि: यह माघ मास के शुक्ल पक्ष (आमतौर पर जनवरी-फरवरी) में आती है। यह शिशिर ऋतु (कड़ाके की ठंड) का समय होता है। इस समय प्रकृति अंतर्मुखी होती है। योग और तंत्र के अनुसार, इस समय की ठंडी और शांत ऊर्जा चक्रों को जाग्रत करने और मन को स्थिर करने के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
 

2. साधना का उद्देश्य:

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि (भौतिक इच्छाएं और शक्तियां): आषाढ़ मास की नवरात्रि मुख्य रूप से सांसारिक बाधाओं को दूर करने, शत्रुओं पर विजय, तंत्र शक्ति, ऐश्वर्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। यदि किसी के जीवन में बहुत अधिक कष्ट, अदालती विवाद या तंत्र बाधा हो, तो आषाढ़ नवरात्रि में उसकी काट की जाती है।
 
माघ गुप्त नवरात्रि (ज्ञान और मोक्ष): माघ मास को धार्मिक रूप से बहुत पवित्र और आध्यात्मिक माना जाता है। इस नवरात्रि में की जाने वाली साधना का मुख्य उद्देश्य आत्मिक उन्नति, मानसिक शांति, ज्ञान, और मोक्ष की प्राप्ति होता है। साधक अपनी चेतना को ऊपर उठाने के लिए इसमें मौन और ध्यान का सहारा लेते हैं।
 

3. पूजनीय देव और महाविद्याएं

यद्यपि दोनों ही गुप्त नवरात्रों में दस महाविद्याओं (काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला) की ही पूजा होती है, लेकिन दोनों में झुकाव अलग होता है:-
 
आषाढ़ मास में: उग्र शक्तियों की साधना अधिक होती है। विशेषकर मां काली, मां धूमावती और मां बगलामुखी (शत्रु नाशिनी) की पूजा इस दौरान चरम पर होती है। इस समय मारण, मोहन, उच्चाटन जैसी तांत्रिक क्रियाओं की काट के अनुष्ठान ज्यादा होते हैं।
 
माघ मास में: सौम्य और ज्ञान प्रदाता देवियों जैसे माता तारा, माता भुवनेश्वरी, माता मातंगी और कमल स्वरूपों की आराधना पर विशेष बल दिया जाता है ताकि बुद्धि और सात्विक शक्तियों का विकास हो।
 

4. साधकों की प्रकृति

आषाढ़ नवरात्रि: यह विशुद्ध रूप से वाममार्ग, कापालिक, अघोर और कठिन तंत्र साधना करने वालों के लिए होती है। इसके नियम इतने कठिन और उग्र होते हैं कि आम गृहस्थों को इसमें गहरी तांत्रिक साधना न करने की सलाह दी जाती है; वे केवल सामान्य पूजा-अर्चना ही करते हैं।
 
माघ नवरात्रि: इसे अघोरी और तांत्रिकों के साथ-साथ ऐसे गृहस्थ भी रख सकते हैं जो बहुत नियम-संयम से रहते हैं और अपनी आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाना चाहते हैं। इसमें सात्विक और मानसिक पूजा को प्रधानता दी जाती है।
 
संक्षेप में कहें तो: माघ गुप्त नवरात्रि जहाँ शीतलता, ज्ञान, शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है, वहीं आषाढ़ गुप्त नवरात्रि ऊर्जा, शक्ति, शत्रु बाधा निवारण और भौतिक सिद्धियों को प्राप्त करने का मार्ग है।

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