Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 (12:56 IST)
Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 (13:00 IST)
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर घटे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अमूमन शांत और सख्त अनुशासन के लिए जाने जाने वाले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना विपक्ष के आचरण और सदन में हुई नारेबाजी से खासे आहत नजर आ रहे हैं।
विधानसभा में सदस्यों के रवैये से दुखी होकर स्पीकर ने यहां तक कह दिया कि वे इस बात का आकलन कर रहे हैं कि वे इस गरिमामयी पद के लायक हैं भी या नहीं।
सदन में ऐसा क्या हुआ जिससे दुखी हुए सतीश महाना?
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने लगातार नारेबाजी और हंगामा किया।
• 'चंदा चोर' के नारों पर तीखी बहस: विपक्ष द्वारा "चंदा चोर, गद्दी छोड़" के नारे लगाए जाने पर अध्यक्ष पीठ का धैर्य जवाब दे गया। सतीश महाना ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा— "अगर आप में से किसी ने चंदा दिया हो, तो रसीद दिखाओ।"
• मुख्यमंत्री के पोस्टर लहराना: बहस के दौरान सपा विधायक सचिन यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर वाले पोस्टर लहराए और आसन के सामने आकर नारेबाजी की।
• सख्त कार्रवाई: आसन की अवमानना और मर्यादित आचरण न करने के कारण अध्यक्ष ने विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।
आसन की पीड़ा: "सदन लोकतंत्र का मंदिर है। जब जनप्रतिनिधि नियमों और परंपराओं को ताक पर रखकर वेल में आकर हंगामा करते हैं और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे संसदीय मर्यादा तार-तार होती है।"
'जल्द बताऊंगा कि पद के लायक हूं या नहीं'
सदन के भीतर और बाहर जिस तरह का माहौल बना, उससे क्षुब्ध होकर स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि वे निष्पक्ष रहकर सदन चलाने का हरसंभव प्रयास करते हैं। इसके बावजूद जब दोनों पक्षों (विशेषकर विपक्ष) से सहयोग नहीं मिलता और आसन पर लांछन लगाए जाते हैं, तो यह बात मानसिक रूप से आहत करती है।
उन्होंने भावुक लहजे में संकेत दिया कि वे जल्द ही इस बात का सार्वजनिक रूप से जवाब देंगे कि क्या वे इस गरिमामय पद के योग्य हैं या नहीं।
यूपी की राजनीति पर क्या होगा असर?
सतीश महाना का यह बयान केवल एक भावुक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की संसदीय राजनीति के लिए बड़ा संदेश है। जब से सतीश महाना ने विधानसभा अध्यक्ष का पद संभाला है, उन्होंने कई नई पहल की हैं— जैसे डिजिटल विधानसभा (e-Vidhan) और सदस्यों को बोलने का समान मौका देना। ऐसे में उनका यह क्षोभ सदन के संचालन और भावी सत्रों के नियमों को और अधिक कड़ा बनाने की ओर इशारा करता है।