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11 महीनों में 200 से ज्यादा आतंकी ढेर

सुरेश एस डुग्गर
गुरुवार, 30 नवंबर 2017 (21:39 IST)
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में 11 महीनों में 200 से ज्यादा आतंकी मारे गए। पिछले साल 12 महीनों में यह संख्या 165 थी। अभी तक करीब 54 नागरिक भी मारे गए और 77 सुरक्षाकर्मी भी। राज्य में 29 सालों से फैले आतंकवाद में मरने वाले नागरिकों और सुरक्षाबलों का आंकड़ा इस साल बढ़ा है। पिछले साल मनाई गई खुशी अब काफूर है क्योंकि मरने वाले नागरिकों की संख्या कई गुणा है जबकि सुरक्षाकर्मियों की संख्या इस बार पिछले साल से अधिक है। सुरक्षाबल और सुरक्षा एजेंसियां इससे नाखुश हैं क्योंकि आतंकियों की मौतों के बावजूद आतंकी बनने का आकर्षण अभी भी बरकरार है। यह इसी से स्पष्ट होता है कि इस साल 200 से अधिक युवा आतंकवाद में शामिल हो गए और खतरनाक आतंकी गुट आईएस के साथ कितने जुड़े इसके प्रति अभी सुरक्षा एजेंसियां अंधेरे में टटोल रही हैं।
 
राज्य में वर्ष 2017 आतंकियों पर ही नहीं बल्कि सुरक्षाकर्मियों पर भी भारी रहा। सीमा व एलओसी पर घुसपैठ कर रहे आतंकियों पर सटीक प्रहारों से देश के दुश्मनों को उनके अंजाम तक पहुंचाया गया, वहीं बेहतर सुरक्षा ग्रिड के बावजूद मौतों में भी कमी नहीं आई है। इस दौरान इस्लामिक स्टेट के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए सुरक्षा ग्रिड को और पुख्ता किया गया।
 
राज्य में आतंकवाद की पकड़ कमजोर होने के चलते सेना व सीमा सुरक्षा बल ने अपनी शक्ति घुसपैठ कर रहे आतंकियों पर केंद्रित की, जिसकी बदौलत सिर्फ एलओसी पर ही घुसपैठ की 92 कोशिशों को नाकाम बनाया गया। जमात-उल-दावा के हाफिज सईद ने घुसपैठ करवाने के लिए खुद लांचिंग पैडों पर डेरा डाला, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। चालू वर्ष में सेना व सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए 200 से अधिक आतंकियों में अधिकतर आतंकी कमांडर शामिल हैं।
 
इस साल अब तक आतंकी घटनाओं में मारे गए कुल 350 लोगों में से 206 आतंकी, 90 सुरक्षाबल व 54 नागरिक शामिल थे। पिछले वर्ष मारे गए 267 लोगों में 165 आतंकी, 88 सुरक्षाकर्मी व 14 नागरिक शामिल थे। कुल मिलाकर सुरक्षाबलों व लोगों की मौतें आतंकियों से कम हुईं और आतंकवाद को आघात लगा। आतंकियों के मंसूबे नाकाम बनाने के लिए कड़ी सुरक्षा की बदौलत इस वर्ष राज्य में 40 आईईडी तलाश कर विस्फोट करने की साजिशें नाकाम हुई। वहीं, 350 हथियार भी बरामद हुए। 
 
दावा यही है कि आतंकवाद में कमी के चलते अलगाववादियों व सीमा पार बैठे उनके आकाओं के हौसले परास्त होने लगे हैं। पाकिस्तान ने साल के दूसरे पखवाड़े में आतंकियों की घुसपैठ करवाने की पूरी कोशिश की और सेना व सुरक्षाबलों ने इसका पूरा फायदा उठाते हुए अधिकतर आतंकियों को मार गिराया। 11 महीनों में मारे गए 206 आतंकियों में से अंतिम छ: महीनों में 146 मारे गए, वहीं अंदर घुसने में कामयाब रहे 37 आतंकियों में से कई आतंकियों को जिंदा पकड़ बड़ी उपलब्धि हासिल की गई। 
 
पर इन कामयाबियों के लेखा-जोखा के बावजूद सुरक्षाधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। ये लकीरें आतंकी बनने का आकर्षण यथावत बरकरार रहने के कारण है। यही नहीं, अब तो कश्मीरी युवा दुर्दांत आतंकी गुट आईएसआईएस की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं जो सबसे अधिक परेशानी का कारण इसलिए भी है क्योंकि आईएस के हत्या और आतंक फैलाने के तौर-तरीकों से सारी दुनिया दहल रही है।

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