एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि आरएसएस के बिना भाजपा का अस्तित्व कमजोर पड़ जाता। अगर आरएसएस नहीं होता, तो भाजपा की स्थिति और खराब होती। हम आज शैतान की छाया से लड़ रहे हैं। शैतान कौन है? आरएसएस। उसकी छाया कौन है? भाजपा। अगर हम छाया से नहीं, असली स्रोत से लड़ें, तो देश अपने आप बेहतर होगा।
खरगे के अनुसार, आरएसएस का 2,500 से अधिक संगठनों का नेटवर्क है, इनमें अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में सक्रिय इकाइयां भी शामिल हैं। संगठन की फंडिंग के स्रोतों की पारदर्शिता पर सवाल उठना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आरएसएस एक अपंजीकृत संगठन है और यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या वह खुद को कानून और संविधान से ऊपर मानता है।जब आम नागरिकों और संस्थाओं को टैक्स देना पड़ता है और हर लेन-देन का हिसाब देना होता है, तो आरएसएस क्यों अलग है?
उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस पुराने बयान का जिक्र किया, जिसमें संगठन को व्यक्तियों का समूह बताया गया था। खरगे ने तंज कसते हुए कहा अगर यह व्यक्तियों का समूह है, तो क्या क्लब और एसोसिएशन भी ऐसे ही नहीं होते? क्या वे पंजीकृत नहीं हैं? क्या वे टैक्स नहीं देते?
खरगे ने गुरु दक्षिणा के नाम पर मिलने वाले चंदे की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह पैसा कहां से आता है? कौन देता है? जब दूसरों के हर रुपए का हिसाब होता है, तो यहां क्यों नहीं?
edited by : Nrapendra Gupta