Publish Date: Sun, 05 May 2019 (15:03 IST)
Updated Date: Sun, 05 May 2019 (15:32 IST)
नई दिल्ली। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की चोरी रोकने के लिए एक निर्धारित सीमा से ऊपर का कारोबार करने वाली कारोबारी इकाइयों के बीच खरीद-फरोख्त के सभी चालान एक केंद्रीयकृत सरकारी पोर्टल से निकालने का नियम सितंबर से अनिवार्य किया जाएगा।
इस तरह के ई-बीजक की व्यवस्था लागू करने के संबंध में केंद्र, राज्यों और जीएसटी नेटवर्क के कुल 13 अधिकारियों की एक समिति बनाई जा चुकी है। केंद्रीय राजस्व सचिव इसको लागू करने के काम की निगरानी कर रहे हैं। केंद्र के एक अधिकारी ने कहा कि बी2बी सौदों के लिए ई-चालान की व्यवस्था 3-4 महीने में लागू कर दी जाएगी। यह काम चरणबद्ध तरीके से होगा। सभी चालान सरकारी पोर्टल से निकालने होंगे।
उम्मीद है कि इससे जीएसटी की चोरी रोकने में काफी मदद मिलेगी और फर्जी चालान के इस्तेमाल पर अंकुश लगेगा। इससे कारोबार करने वाली इकाइयों के लिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करना भी और असान हो जाएगा, क्योंकि उनके कारोबार में माल के चालान का आंकड़ा केंद्रीयकृत पोर्टल में पहले से दर्ज होगा।
अधिकारी ने बताया कि इसके लिए सालाना एक न्यूनतम सीमा से अधिक का कारोबार करने वाली इकाइयों को ऐसा सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया जाएगा, जो जीएसटीएन नेटवर्क से जुड़ा होगा। इसकी मदद से से वे दूसरी कारोबारी इकाई को बेचे गए माल या सेवा के संबंध में ई-चालान निकाल सकेंगी। माल की खेप के मूल्य के आधार पर ई-चालान का नियम लागू किया जा सकता है।
अधिकारी ने कहा कि यह व्यवस्था लागू होने पर कारोबारी इकाइयां जरूरत होने पर माल के चालान (बीजक) के साथ साथ ई-वे बिल (ई-मार्ग बिल) भी निकाल सकेंगी। ई-मार्ग बिल 50,000 रुपए से ऊपर की खेप दूर के ठिकानों पर भेजने के लिए जरूरी होती है।
यह व्यवस्था सुचारु रूप से लागू होने के बाद सरकार इसे ऐसे क्षेत्रों में कारोबारी इकाई और उपभोक्ता (बी2सी) के बीच के लेन देन पर भी लागू कर सकती है, जहां करापवंचन की आशंका ज्यादा दिखती हो। इस समय देशभर में कुल 1.21 करोड़ व्यावसायिक इकाइयां जीएसटी में पंजीकृत हैं। इनमें से 20 लाख कंपोजिट (एकमुश्त कर भुगतान सुविधा) योजना के तहत पंजीकृत इकाइयां हैं। (भाषा)