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EPFO Minimum Pension Hike: कितनी बढ़ेगी पीएफ की पेंशन, अगले महीने हो जाएगा फैसला, जानिए श्रम संगठनों की कितनी है मांग

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EPFO Minimum Pension Hike
Minimum Pension Hike: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से न्यूनतम मासिक पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे ईपीएस-95 (EPS-95) पेंशनर्स की उम्मीदें एक बार फिर जाग उठी हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम पेंशन की राशि में इजाफे के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की एक महत्वपूर्ण बैठक अगले महीने नवंबर 2026 में आयोजित होने जा रही है।
 
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक बोर्ड की 240वीं बैठक 19 नवंबर 2026 को होगी। आमतौर पर नई दिल्ली में आयोजित होने वाली इस बैठक का आयोजन इस बार गुजरात में किया जाएगा। मार्च 2022 (गुवाहाटी) के बाद यह पहला मौका है जब सीबीटी की बैठक दिल्ली से बाहर आयोजित हो रही है। हालांकि आधिकारिक एजेंडा अंतिम रूप से जारी होना बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि बोर्ड की इस बैठक में न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को प्राथमिकता से शामिल किया जा सकता है। 

कितनी हो सकती है न्यूनतम पेंशन?

वर्तमान में ईपीएस-95 (EPS-95) के तहत पात्र पेंशनभोगियों को 1000 रुपए प्रतिमाह की न्यूनतम पेंशन मिलती है, जो सितंबर 2014 से लागू है। यदि बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और सरकार वित्तीय व्यवहार्यता के आधार पर निर्णय लेती है, तो न्यूनतम पेंशन में 3 से 7 गुना तक की बढ़ोतरी संभव है।
 
माना जा रहा है कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 3000 से 5000 प्रतिमाह किया जा सकता है। यदि श्रम संगठनों की बात मानी जाती है तो पेंशन को बढ़ाकर 7 हजार 500 प्रतिमाह तक भी की जा सकती है। हाल ही में केंद्र सरकार ने 17 सितंबर 2026 से ईपीएफओ कवरेज के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 प्रतिमाह कर दिया था। इस कदम के बाद पेंशन फंड का दायरा बढ़ा है, जिससे न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की संभावना को बल मिला है। 

क्या है पेंशनर्स की मांग?

ट्रेड यूनियनों और ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) द्वारा लंबे समय से केंद्र सरकार और ईपीएफओ के समक्ष कई मांगें रखी जा रही हैं। इनके मुताबिक न्यूनतम पेंशन 1000 से बढ़ाकर 7,500 रुपए प्रतिमाह की जाए। साथ ही पेंशन को महंगाई सूचकांक से जोड़ते हुए महंगाई भत्ता प्रदान किया जाए। पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी को आयुष्मान भारत या ईएसआई के तहत मुफ्त और व्यापक चिकित्सा कवरेज मिलना चाहिए। 
 
इस मामले में श्रम संगठनों का तर्क है कि आज के महंगाई के दौर में 1,000 रुपए महीने की पेंशन में दवा और राशन का खर्च उठाना भी असंभव है। इसलिए बुजुर्ग पेंशनरों के सम्मानजनक जीवन के लिए पेंशन में तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी की जानी चाहिए। हालांकि सरकार के सामने भी चुनौती कम नहीं है।

क्या हैं सरकार के सामने चुनौतियां?

वर्तमान में 1000 न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार अपने बजट से अंशदान देती है। पेंशन को 7,500 तक बढ़ाने पर सरकार पर हजारों करोड़ रुपए का अतिरिक्त सालाना वित्तीय बोझ पड़ेगा। हालांकि लोगों का यह भी मानना है कि जब लाड़ली बहना और मुफ्त अनाज वितरण जैसी योजनाओं पर सरकार करोड़ों रुपए खर्च करती है तो फिर वर्षों जी-तोड़ मेहनत करने वाले और पीएफ में लंबे समय तक अंशदान देने वाले बुजुर्गों के लिए पेंशन वृद्धि क्यों नहीं की जा सकती। 

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