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‘कॉकरोच’ कहने पर हिला दी सरकार! पढ़िए CJP आंदोलन से अभिजीत दीपके को मिले 3 सबसे बड़े सबक

1 ट्वीट, 2.6 करोड़ युवा और शिक्षामंत्री का इस्तीफा!

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Abhijeet Dipke
Gen Z Protests India: बॉस्टन के एक कमरे में बैठा 30 साल का अंतर्मुखी नौजवान—दिमाग में सिर्फ दो बातें: नौकरी और एजुकेशन लोन की अदायगी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अभिजीत दीपके ने कभी नहीं सोचा था कि वे भारत के इतिहास के सबसे बड़े और मुखर छात्र आंदोलनों में से एक की अगुवाई करेंगे।
 
हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) के ओपिनियन वीडियो में अभिजीत दीपके ने उस पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया है कि कैसे एक तंज से भरे ट्वीट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party) का रूप लिया और सत्ता के गलियारों को हिलाकर रख दिया। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

एक ट्वीट और 5 दिन में 1 करोड़ लोग : आंदोलन की शुरुआत

इस ऐतिहासिक मोड़ की शुरुआत तब हुई जब देश के मुख्य न्यायाधीश ने बेरोजगार युवाओं के एक हिस्से को कथित तौर पर 'कॉकरोच' (ऐसे नौजवान जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और समाज में जगह नहीं मिलती) कहकर संबोधित किया।
 
बॉस्टन में बैठे अभिजीत दीपके ने X पर लिखा: "क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?"
 
यह सवाल इंटरनेट पर आग की तरह फैला। महज 5 दिनों के भीतर 1 करोड़ लोग इस डिजिटल मुहिम से जुड़ गए—जो भारत की सत्ताधारी पार्टी के कुल सक्रिय सदस्यों से भी ज्यादा थे। दो महीनों के भीतर यह आंकड़ा 2.6 करोड़ के पार पहुंच गया। ALSO READ: CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

आंदोलन का तात्कालिक कारण:

  • पेपर लीक और रद्द परीक्षा : लाखों छात्रों द्वारा दी गई राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में धांधली और पेपर लीक के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी।
  • 20 से ज्यादा छात्रों की खुदकुशी : रिपोर्टों के मुताबिक, इस विवाद के कारण 20 से अधिक अभ्यर्थियों ने हताशा में अपनी जान दे दी।
  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग : युवाओं का गुस्सा उस शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ चरम पर पहुंच गया जहां सालों की मेहनत का सिला सिर्फ बेरोजगारी और पेपर लीक के रूप में मिल रहा था।

अभिजीत दीपके के 3 सबसे बड़े सबक

अभिजीत दीपके ने अपने अनुभव साझा करते हुए जेन-जी और देश के नागरिकों के लिए तीन मुख्य सबक बताए हैं:
 
पहला सबक : किस्मत और सही वक्त (Timing & Opportunity)
अमेरिका में बैठे होने के बावजूद दीपके ने तुरंत भांपा कि भारत का युवा खारिज किए जाने से गुस्से में है। वे कहते हैं कि सरकारें और मीडिया हर रात टीवी डिबेट्स के जरिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और हिंदू-मुसलमान की बहस में असली मुद्दों (जैसे नौकरी और शिक्षा) को दबा देती हैं। लेकिन Gen-Z अलग है—वह मुखर है और कम पर राजी नहीं होती। ALSO READ: CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल
 

दूसरा सबक : हिम्मत (Courage in Face of Threat)

जब आंदोलन बढ़ा, तो तंत्र ने उन्हें "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा" बताना शुरू किया।
 
  • भारत लौटने का फैसला : वकीलों ने कहा कि यह पागलपन है, पत्रकारों ने चेतावनी दी कि एयरपोर्ट पर उतरते ही जेल होगी और मां टूट गई थीं।
  • एयरपोर्ट का हाई-ड्रामा : भारत उतरते ही प्लेन में खास अनाउंसमेंट हुई। 15-20 पुलिस अधिकारियों ने उन्हें घेर लिया और एक तैयार लेटर पर साइन करने को कहा। दीपके ने मना कर दिया और पुलिस के सामने बैठकर हाथ से लिखा: "मैं भारत का नागरिक हूं, विरोध प्रदर्शन मेरा लोकतांत्रिक अधिकार है। अगर आपको यह मंजूर नहीं, तो आप मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं।" प्रशासन को झुकना पड़ा और उन्हें जाने दिया गया।

तीसरा सबक : जिद और निरंतरता (Persistence)

दिल्ली के धरनास्थल पर 36 दिनों से ज्यादा प्रदर्शन चला। 200 लोगों से शुरू हुआ आंदोलन हजारों की भीड़ में बदल गया।
 
सबसे बड़ी जीत : डर का टूटना
अभिजीत दीपके का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी जीत शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं है। असली जीत यह है कि पिछले एक दशक से भारत के लोगों के दिलों में सरकार से सवाल पूछने का जो डर बैठा था, वह डर अब टूट चुका है।
 
वे मुख्यधारा के मीडिया पर भी कड़ा हमला बोलते हुए कहते हैं कि गोदी मीडिया को देश के युवाओं की बात सुननी ही पड़ेगी, क्योंकि युवा ही इस देश की बहुसंख्यक आवाज हैं।
 
"शिक्षा कोई व्यापार नहीं, भारत में पैदा हुए हर बच्चे का मौलिक अधिकार है।" — अभिजीत दीपके
 

'कॉकरोच जनता पार्टी' का देशव्यापी अभियान

अब यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी अब हर राज्य में जाकर जमीनी समस्याओं, युवाओं के दर्द और उनकी उम्मीदों को समझने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू कर रही है।
 
Gen-Z अपनी स्क्रीन के जरिए दुनिया भर के लोकतंत्र और अवसरों को देख रही है। वह जानती है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर शिक्षा उनका हक है। जब न रोजी-रोटी संभल रही हो, न बच्चों की पढ़ाई, तो चुपचाप बैठना और शिकायत न करना अब किसी विकल्प में शामिल नहीं है।

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