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London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

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London Trip
London Trip 3: लंदन की यातायात व्यवस्था पर नजर डालते हैं। वहां मेट्रो और सिटी बसों की बात करते हैं। मेट्रो को वहां अंडरग्राउंड व ट्यूब कहते हैं। लंदन शहर की आबादी 91 लाख है तो उपनगरों को मिलाकर डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं। वहां यातायात का प्रमुख साधन लोक परिवहन ही है। याने मेट्रो व सिटी बस। 543 मेट्रो में रोजाना 32 लाख लोग यात्रा करते हैं। इनमें कुल 4 हजार डिब्बे लगे होते हैं। ये शुक्रवार, शनिवार को 24 घंटे चलती हैं, जबकि अन्य दिनों में सुबह 5 से रात 12 बजे तक। दूसरी तरफ करीब 9 हजार डबल डेकर सिटी बस में 50 लाख लोग सफर करते हैं।

यहां की मेट्रो दुनिया की पहली सेवा है, जो 1863 में प्रारंभ हुई थी, जब और कहीं सोचा भी नहीं जा रहा होगा। 272 स्टेशन के साथ 402 किमी लंबे मार्ग पर यह यात्रा होती है। इसे मुंबई के साथ देखें तो यहां आबादी शहर की 2 करोड़ है और उपनगर सहित 2.35 करोड़ है। 2342 लोकल ट्रेन चलती हैं, जिनमें रोजाना 75 लाख लोग यात्रा करते हैं। वहीं 2600 सिटी बसों में 25 लाख लोग सफर करते हैं। ALSO READ: Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम
 
चूंकि इन दिनों इंदौर में मेट्रो का काम चल रहा है और आंशिक रूप से शुरू भी हुई है तो इस पर बात करते हैं। इंदौर की आबादी करीब 35 लाख है। मेट्रो को पूरी तरह से शुरू होने में न्यूनतम 5 वर्ष तो लगेंगे ही। तब तक लोक परिवहन के तौर पर सिटी बस,ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा, नगर सेवा पर निर्भरता है। इंदौर में 35 लाख की आबादी पर 16.33 लाख दो पहिया व 3.38 लाख चार पहिया वाहन पंजीकृत हैं। इनमें कुछ आसपास के इलाकों के भी होंगे। यहां 5.88 लाख आवास हैं। इसका मतलब प्रत्येक दूसरे घर में कार है और प्रत्येक घर में औसत तीन दो पहिया वाहन है। जबकि लंदन की 90 लाख आबादी 37 लाख घरों में रहती है। यहां 80 प्रतिशत लोग मेट्रो व सिटी बस में सफर करते हैं। ALSO READ: Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे
 
वहां 26.3 लाख कारें व 1.30 लाख दोपहिया वाहन पंजीकृत हैं। वहां अत्यधिक धनी व्यक्ति ही कार में आना-जाना करता है, क्योंकि शहर में पार्किंग बहुत मंहगी है। सेंट्रल लंदन में दिन भर के लिए 15 से 50 पाउंड (एक पाउंड 130 रुपए का है) तक चार्ज हैं, भले ही एक घंटे में वापस चले जाएं। मोहल्लों में भी बाहरी व्यक्ति को सड़क के दोनों ओर कार पार्क करने की अनुमति तो मिलती है, लेकिन उसके भी चार्ज हैं, जो 4.90 से 7.20 पाउंड (529 से 760 रुपए) तक है। रहवासी के लिए मासिक शुल्क है। याने वहां फ्री फोकट में कुछ नहीं है। मेट्रो में एक रूट के 6 पाउंड लगते हैं, लेकिन 16 पाउंड में दिन भर किसी भी रूट पर आ-जा सकते हैं।
 
इंदौर में लोक परिवहन की दयनीय स्थिति किसी से छुपी नहीं है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि हम लोक परिवहन का उपयोग करना भी नहीं चाहते। हमें ठेठ दुकान व घर तक अपने ही वाहन से जाना है। मेट्रो को तो अभी गिनें ही नहीं। तब लोक परिवहन में केवल 350 सिटी बसें हैं। 20 हजार ऑटो रिक्शा व 8 हजार ई-रिक्शा हैं। 20 लाख पंजीकृत कार-दोपहिया में से यदि 5 लाख भी इंदौर की सड़क पर चलते होंगे तो कल्पना कर लीजिए कि शहर में यातायात का किस कदर सत्यानाश होता रहेगा। वैसे, लोक परिवहन का उपयोग एक आदत होती है, जो हमारी अभी तो नहीं है। हम स्वयं के वाहन से ही आना-जाना अपनी शान समझते हैं, जबकि लंदन या यूरोप में प्रधानमंत्री, मंत्री, मेयर, अधिकारी, करोड़पति, सेलिब्रिटी भी मेट्रो में सफर कर लेते हैं। (क्रमश:)। लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।  

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