biodatamaker

मध्यप्रदेश : खंडवा में पार्टियों के लिए मुसीबत बन सकते हैं बागी

Webdunia
सोमवार, 26 नवंबर 2018 (16:50 IST)
खंडवा। मध्यप्रदेश की खंडवा विधानसभा में निर्दलीयों का कई बार मुख्य दलों के प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ने के इतिहास के साथ इस बार भी निर्दलीय मुसीबत बन सकते हैं।


सन् 1952 से 2013 तक खंडवा विधानसभा क्षेत्र में एक उपचुनाव सहित कुल 15 चुनावों में अब तक कुल 36 निर्दलीय प्रत्यशियों ने अपनी किस्मत आजमाई। हालांकि कोई अपनी जमानत नहीं बचा पाया। सन् 1952 के विधानसभा चुनाव में कुल 6 प्रत्याशी थे, जिसमें दो निर्दलीय राज सिंह शिवनाथ सिंह ने 14 हजार 601 और पावजी रामचंद्र ने चार हजार 807 मत प्राप्त किए।

वर्ष 1957 में 1 निर्दलीय, इसके बाद 1962, 1967 और 1972 के तीनों आम चुनाव में एक भी निर्दलीय चुनाव मैदान में नहीं था। वर्ष 1977 में फिर 3 ने बिना किसी दल के अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन वे महज़ 200-300 वोटों में ही सिमटकर रह गए। वर्ष 1980 में इनकी संख्या बढ़कर चार हुई जिसमें शम्सुद्दीन ने एक हजार का आंकड़ा पार किया।

साल 1985 में निर्दलीयों की संख्या बढ़कर छह हो गई, लेकिन कोई भी पांच सौ वोट भी हासिल नहीं कर सका। वर्ष 1990 में पांच निर्दलय रहे। निर्दलीयों का उत्साह 1993 में चरम पर पहुंचा, जब सर्वाधिक 10 निर्दलीय चुनाव मैदान में थे। इसमें सबसे ज्यादा प्रचार करने वाले फारुख को अधिकतम 829 वोट मिले।

वर्ष 1998 के आम चुनाव में सिर्फ 2 निर्दलीय थे लेकिन वे बहुत महत्वपूर्ण साबित हुए। एक तो कांग्रेस के ही बागी वीरेंद्र मिश्र मैदान में डट गए। उन्होंने सात हजार 879 मत हासिल किए। वे खुद की जमानत नहीं बचा सके, लेकिन कांग्रेस के जीत के बहुत करीब पहुंच चुके अवधेश सिसौदिया के समीकरण उन्होंने बिगाड़ दिए।

इस चुनाव ने निर्दलीयों की भूमिका को पहली बार रेखांकित कर दिया। सिसोदिया भाजपा के हुकुमचंद यादव से सिर्फ 71 मतों से पराजित हो गए। इसके बाद वर्ष 2003 में सिर्फ एक निर्दलीय मैदान में उतरा। मांगीलाल कानूनगो नाम के ये निर्दलीय शिवसेना और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी से भारी रहे। उन्हें एक हजार 988 मत मिले, जो इन दोनों दलों को प्राप्त मतों से दुगुने से ज्यादा थे।

वर्ष 2013 के चुनाव में फिर किसी निर्दलीय ने हिम्मत नहीं जुटाई, जिससे मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में सीधा हुआ। इस बार खंडवा विधानसभा से तीन निर्दलीय समेत कुल 7 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें कांग्रेस और भाजपा के एक-एक बागी भी शामिल हैं। कांग्रेस के बागी राजकुमार कैथवास कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं तो भाजपा के बागी कौशल मेहरा ने भी खौफ पैदा कर दिया है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

बहन से राखी बंधाकर गया था दिल्‍ली, वापस नहीं लौटा देवास का अर्पित, लापरवाही ने ले ली 18 साल के बेटे की जान

Electric Scooter : Simple Wave का Review, दमदार परफॉर्मेंस के साथ 243 KM तक रेंज, खूबियां और कीमत भी जानना जरूरी

ChatGPT Users के लिए बड़ी खबर, Plus सब्सक्राइबर्स के लिए GPT-6 Astra का रोलआउट शुरू, जानिए कैसे मिलेगा एक्सेस

LPG Cylinder Booking Rule Changed : अब गांव-शहर में 25 दिन बाद बुक होगा घरेलू गैस सिलेंडर, सरकार ने दी बड़ी राहत

कौन है हरिराम बंसल जिसे दिल्ली बिल्डिंग हादसे में पुलिस ने किया गिरफ्तार?

सभी देखें

नवीनतम

इंदौर में पेड़ गिरा, डिप्टी कलेक्टर की मां की दर्दनाक मौत, बहन और बहनोई बुरी तरह घायल, रेस्‍क्‍यू के लिए पहुंची टीम

बहन से राखी बंधाकर गया था दिल्‍ली, वापस नहीं लौटा देवास का अर्पित, लापरवाही ने ले ली 18 साल के बेटे की जान

सागर में जहरीली शराब से अब तक 22 की मौत, 100 से अधिक की हालत गंभीर, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

हिमाचल में चंद्रताल और गेपांग गथ समेत 9 झीलें बनीं 'वॉटर बम' जरा सी हलचल से तबाह हो सकते हैं 15 पुल और शहर

अगला लेख