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मां पर सुंदर कविता : मां रंगोली सा इंद्रधनुषी प्यार

स्मृति आदित्य
उसकी केशर सुगंध
मेरे रोम-रोम से
प्रस्फुटित होती है,
मेरी सांस-सांस की हर महक
उसकी आत्मा से उठती है
वह देहरी पर सजी रंगोली सा
इंद्रधनुषी प्यार है,
मां जिसकी बिंदी में समाया
मेरा संपूर्ण श्रृंगार है,
मेरी संपूर्ण संसार है...

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