Festival Posters

मकर संक्रांति 2021 : इस सूर्य कवच से मिलता है आरोग्य और सौभाग्य का वरदान

Webdunia
16
14 जनवरी 2021 को संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सूर्यदेव अपनी राशि परिवर्तन कर प्रात: 8 बजकर 05 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही देशभर में मकर-संक्रांति के पर्व का शुभारंभ हो जाएगा।
 
वर्ष 2021 में मकर-संक्रांति का पुण्यकाल प्रात: 8 बजकर 05 मिनट से रात्रि 10 बज कर 46 मिनट तक रहेगा।
 
वर्ष 2021 में संक्रांति का वाहन सिंह (व्याघ्र) एवं उपवाहन गज (हाथी) रहेगा। इस वर्ष संक्रांति का आगमन श्वेत वस्त्र व पाटली कंचुकी धारण किए बालावस्था में हो रहा है। संक्रांति कस्तूरी लेपन कर गदा आयुध (शस्त्र) लिए स्वर्णपात्र में अन्न भक्षण करते हुए आग्नेय दिशा को दृष्टिगत किए पूर्व दिशा के ओर गमन करते आ रही है। 
 
मकर संक्रांति पर इस सूर्य कवच के पाठ से 7 पीढ़ियों की रक्षा होती है, ऐसा पुराणों में लिखा है... 
 
 
सूर्य कवच शरीर को आरोग्य देने वाला है तथा संपूर्ण दिव्य सौभाग्य को देने वाला है। सूर्य रक्षात्मक स्तोत्र को भोजपत्र में लिखकर जो हाथ में धारण करता है तो संपूर्ण सिद्धियां उसके वश में होती हैं....
 
'सूर्यकवचम' 
 
याज्ञवल्क्य उवाच-
 
श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।
शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।1।
 
याज्ञवल्क्यजी बोले- हे मुनि श्रेष्ठ! सूर्य के शुभ कवच को सुनो, जो शरीर को आरोग्य देने वाला है तथा संपूर्ण दिव्य सौभाग्य को देने वाला है।
 
देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।
ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत् ।2।
 
चमकते हुए मुकुट वाले डोलते हुए मकराकृत कुंडल वाले हजार किरण (सूर्य) को ध्यान करके यह स्तोत्र प्रारंभ करें।
 
शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।
नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर: ।3।
 
मेरे सिर की रक्षा भास्कर करें, अपरिमित कांति वाले ललाट की रक्षा करें। नेत्र (आंखों) की रक्षा दिनमणि करें तथा कान की रक्षा दिन के ईश्वर करें।
 
ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।
जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित: ।4।
 
मेरी नाक की रक्षा धर्मघृणि, मुख की रक्षा देववंदित, जिव्हा की रक्षा मानद् तथा कंठ की रक्षा देव वंदित करें।
 
सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।
दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय: ।5।
 
सूर्य रक्षात्मक इस स्तोत्र को भोजपत्र में लिखकर जो हाथ में धारण करता है तो संपूर्ण सिद्धियां उसके वश में होती हैं।
 
सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।
सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति ।6।
 
स्नान करके जो कोई स्वच्छ चित्त से कवच पाठ करता है वह रोग से मुक्त हो जाता है, दीर्घायु होता है, सुख तथा यश प्राप्त होता है। 
आ रही है मकर संक्रांति, जानिए कौन से 4 काम होते हैं इस दिन शुभ
इस संक्रांति 5 सूर्य मंत्र और 12 सूर्य नामों से चमका लीजिए अपनी किस्मत
ALSO READ: मकर संक्रांति के बारे में 13 बड़ी बातें, पर्व मनाने से पहले जानिए यहां....
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

कौन था मायावी कालनेमि? योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद क्यों छिड़ी है सनातन पर नई बहस?

धार की भोजशाला: जहाँ पत्थरों पर खुदी है 'संस्कृत' और दीवारों में कैद है परमारों का वैभव

नर्मदा परिक्रमा का क्या है महत्व, कितने दिन चलना पड़ता है पैदल

Video: यमुना नदी में कालिया नाग का अवतार? सोशल मीडिया पर वायरल दावे का जानिए पूरा सच

Vastu Remedies: वास्तु दोष निवारण के सबसे असरदार 5 उपाय

सभी देखें

धर्म संसार

25 January Birthday: आपको 25 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 25 जनवरी 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

भीष्म अष्टमी 2026: पितामह का निर्वाण दिवस, जानें इस दिन का महत्व

Weekly Rashifal 2026: साप्ताहिक राशिफल (26 जनवरी से 01 फरवरी 2026): जानिए इस सप्ताह आपके सितारे क्या कहते हैं!

नर्मदा की अनंत धारा: एक विद्धत चेतना का आह्वान

अगला लेख