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जानिए महावीर स्वामी के चिह्न का महत्व

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24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का चरण चिह्न सिंह (वनराज) है। सिंह अपने बल पर जंगल का राजा होता है, अपने क्षेत्र में निर्भय होकर विचरण करता है। वह पराक्रम और शौर्य का प्रतीक है। 
 
* भगवान महावीर स्वामी ने कहा है कि तुम भी सिंह के समान पराक्रमी, साहसी और निर्भयी बनो। कायर, दुर्बल और भयभीत रहने वाला भूतों का भोजन बन जाता है। कमजोर को सभी खा जाना चाहते हैं, कोई उसकी मदद करने नहीं आता। 
 
सिंह के इसी गुण से हम यह शिक्षा ले सकते हैं कि अपने स्वभाव के विपरीत कोई काम न करें। बुरे समय में भी कोई बुरा काम न करें। भगवान महावीर के चिह्न लोक मंगल के प्रतीक हैं।

24 तीर्थंकरों के अलग-अलग चिह्नों में ‍ज्ञान, शिक्षा और प्रेरणा का भंडार है, उनसे सीख लेकर हम आध्यात्मिक बनकर जीवन के सभी पापों से दूर रह सकते हैं। 
 

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