Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 (14:28 IST)
Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 (14:36 IST)
सरकारी आदेश के तहत प्रभावित क्षेत्रों में 12 तरह की राहत उपलब्ध कराई जा सकेगी। इनमें भूमि राजस्व की वसूली से छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली पर रोक, कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत और पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर उपलब्ध कराना शामिल है।
अहिल्यानगर, अमरावती, बीड, भंडारा, गढ़चिरौली, जलगांव, लातूर, नागपुर, नांदेड़, नंदुरबार, परभणी, पुणे, रत्नागिरी, सांगली, सिंधुदुर्ग, सोलापुर, वर्धा और यवतमाल समेत राज्य के 34 में से 32 जिलों के तालुकों पर लागू होगा।
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क्यों पड़ी सूखे जैसी स्थिति घोषित करने की जरूरत?
2026 की सूखा प्रबंधन संहिता के अनुसार, मानसून के दौरान लगातार कम से कम 21 दिनों तक बारिश न होना ट्रिगर-1 की स्थिति मानी जाती है। सरकार ने जिन 265 तालुकों को राहत आदेश में शामिल किया है, वहां पिछले 21 दिन से बारिश नहीं हुई है।
1 जून से 22 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में औसतन 787.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 953.2 मिलीमीटर है। सोलापुर जिले में सामान्य से 57% कम बारिश हुई। अहिल्यानगर में बारिश की कमी 42%, नंदुरबार में 34% और सांगली में 24% दर्ज की गई। महाराष्ट्र से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी 5 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की संभावना है। राज्य में कुल बारिश सामान्य से 17% कम है, जबकि देशभर में यह कमी 15% है।
अल नीनो का असर
मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत 'अल नीनो' परिस्थितियां बनी हुई हैं, जिसके कारण मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक रहता है। इसे ही भारत में कमजोर मानसूनी बारिश और सूखे के मुख्य कारणों में से एक माना जा रहा है।
राज्य में दक्षिण पश्चिमी मानसून की विदाई 5 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की संभावना है, लेकिन इस सरकारी फैसले से प्रभावित इलाकों में किसानों को फसल नुकसान के मुआवजे और प्रशासनिक राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है।