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महाभारत के युद्ध में 18 अक्षौहिणी सेना ने लड़ा था युद्ध, इतने थे सैनिक

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Mahabharata War
महाभारत के युद्ध में 18 अक्षौहिणी सेना ने मिलकर युद्ध लड़ा था। एक अक्षौहिणी सेना में कितने हाथी, घोड़े, पैदल आदि होते हैं और कितने सैनिक होते हैं? इसके अलावा कौन कौन महारथी लड़े थे इस युद्ध में जानिए रोचक जानकारी।
 
18 अक्षौहिणी सेना : महाभारत के आदिपर्व और सभापर्व अनुसार महाभारत के युद्ध में कौरवों के पास 11 अक्षौहिणी तथा पांडवों के पास 7 अक्षौहिणी सेना थी। कौरवों के पास ज्यादा सैन्य बल और महारथी होने के बाद भी वे जीत नहीं सके। अक्षौहिणी सेना के चार भाग होते हैं- हाथी सवार, रथी, घुड़सवार और पैदल सैनिक। एक घोड़े पर एक सवार, हाथी पर दो और रथ पर भी दो लोग। रथ में चार घोड़े लगे रहते हैं। इनके आसपास 5 पैदल सैनिक होते हैं।
 
एक रथ, एक हाथी, पांच पैदल सैनिक और तीन घोड़ों को मिलाकर एक पत्ति, तीन पत्ति का एक सेनामुख, तीन सेनामुख का एक गुल्म, तीन गुल्म का एक गण, तीन गण की एक वाहिनी, तीन वाहिनी की एक पृतना, तीन पृतना की एक चमू, तीन चमू की एक अनीकिनी और दस अनीकिनी की एक अक्षौहिणी सेना बनती होती है।
 
एक अक्षौहिणी सेना में 21 हजार आठ सौ सत्तर रथ, 21 हजार आठ सौ सत्तर हाथी, एक लाख नौ हजार 350 पैदल सैनिक, पैंसठ हजार छह सौ दस घोड़े होते हैं। अर्थात 2 लाख 18 हजार 700 (218700) यह सभी एक अक्षौहिणी सेना में होते हैं। संपूर्ण 18 अक्षौहिणी सेना की संख्या जोड़े तो लगभग अनुमानित 1968300 सैनिकों की संख्या होती है। हालांकि कई जगह पढ़ने को मिलता है कि लगभग 45 लाख लोगों ने इस युद्ध में भाग लिया था। जिसमें सैनिक के अलावा सभी तरह के लोग शामिल थे। जैसे शिविर में व्यवस्था देखने वाले, रसोइया, अस्त्र शस्त्र भंडारण करने वाले लोग आदि।
 
महाभारत के मृत या जीवित बचे योद्ध : लाखों लोगों के मारे जाने के बाद कहते हैं कि लगभग 24,165 कौरव सैनिक लापता हो गए थे। जबकि महाभारत के युद्ध के पश्चात कौरवों की तरफ से 3 और पांडवों के तरफ से 15 यानी कुल 18 योद्धा ही जीवित बचे थे। जिनके नाम हैं- कौरव के : कृतवर्मा, कृपाचार्य और अश्वत्थामा, जबकि पांडवों की ओर से युयुत्सु, युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल, सहदेव, श्रीकृष्ण, सात्यकि आदि। माना जाता है कि महाभारत युद्ध में एकमात्र जीवित बचा कौरव युयुत्सु था।
 
कौरवों की ओर से लड़ाई लड़ने वाले महारथियों के नाम निम्न है-
भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा, मद्रनरेश शल्य, भूरिश्रवा, अलम्बुष, कृतवर्मा, कलिंगराज, श्रुतायुध, शकुनि, भगदत्त, जयद्रथ, विन्द-अनुविन्द, काम्बोजराज, सुदक्षिण, बृहद्वल, दुर्योधन व उसके 99 भाई। 99 भाइयों में विकर्ण और दुशासन प्रमुख थे। इसके अलावा श्रीकृष्ण की नारायशी सेना में हजारों महारथी थे।
 
पांडवों की ओर से लड़ाई लड़ने वाले महारथियों के नाम निम्न है-
भीम, नकुल, सहदेव, अर्जुन, युधिष्टर, द्रौपदी के पांचों पुत्र, युयुधान (सात्यिकी), उत्तमौजा (द्रौपदी का भाई), राजा विराट, राजा द्रुपद, धृष्टद्युम्न, अभिमन्यु, पाण्ड्यराज, घटोत्कच, शिखण्डी, युयुत्सु, कुन्तिभोज, उत्तमौजा, शैब्य या शैव्य, चेकितान और अनूपराज नील। इसके अलावा काशी राज, धृष्टकेतु (शिशुपाल का पुत्र), पुरुजीत (कुंती का भाई), युद्धामन्यु (द्रौपदी का भाई), प्रतिविंध्य (युधिष्ठिर का पुत्र), सुतसोम (भीम का पुत्र), श्रुतकर्मा (अर्जुन का पुत्र), शतानीक (नकुल का पुत्र), श्रुतसोम (सहदेव का पुत्र) आदि।

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