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दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का एलान, जानें क्या है सीट के सियासी समीकरण?

दतिया विधानसभा चुनाव में दांव पर BJP के दिग्गज नरोत्तम मिश्रा की प्रतिष्ठा

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Datia Assembly by-election
मध्यप्रदेश की हाईप्रोफाइल विधानसभा सीट दतिया पर चुनाव आयोग ने उपचुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। चुनाव आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में दतिया में 30 जुलाई को मतदान होगा। वहीं 3 अगस्त को चुनाव नतीजें आएंगे। गौरतलब है कि दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट से दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एफडी धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता खत्म हो गई थी और सीट रिक्त घोषित हो गई थी।
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दतिया में नरोत्तम मिश्रा के सामने कौन?-दतिया में भाजपा की ओर से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की उम्मीदवारी करीब-करीब तय है और उन्होंने चुनाव की तारीखों के एलान से पहले ही अपना चुनाव प्रचार शुरु कर दिया  है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से मात खाने वाले भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोतत्तम मिश्रा जिस अंदाज में दतिया में सक्रिय रहे, उससे यह करीब तय है कि नरोतम मिश्रा ही भाजपा के उम्मीदवार होंगे।

वहीं नरोत्तम मिश्रा के ओर से कांग्रेस की तरफ से कौन चुनावी मैदान में होगा, यह बड़ा सवाल है। कांग्रेस के संभावित चेहरे में सबसे बड़ा नाम अवधेश नायक का है। भाजपा से कांग्रेस में गए अवधेश नायक को 2023 के विधानसभा चुनाव में पहले कांग्रेस ने अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया था लेकिन टिकट के एलान के बाद जिस तरह से दतिया से भोपाल तक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राजेंद्र भारती के समर्थकों ने हंगामा किया था, उससे पार्टी को अपना फैसले बदलने को मजबूर होना प़ड़ा था और अवधेश नायक की जगह राजेंद्र भारती को चुनावी मैदान में उतार गया। वहीं अब जब जब दतिया में उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है तो अवधेश नायक कांग्रेस की तरफ से सबसे मजबूत दावेदार है।
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नरोत्तम मिश्रा की अग्निपरीक्षा- दतिया विधानसभा सीट पर नरोत्तम मिश्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय समीकरण साधना है। जातीय समीकरण की बात करें तो यहां पर ब्राह्मण समुदाय अहम प्रभाव रखते हैं,विधानसभा सीट पर 35 हजार से अधिक ब्राह्मण मतदाता हैं जो चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करते है। ऐसे में अगर कांग्रेस अवधेश नायक को चुनावी मैदान में उतारती तो वह भी नरोत्तम मिश्रा की तरह ब्राह्मण समुदाय से आते है, तो चुनाव में वोट का बंटवारा तय है।

नरोत्तम मिश्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती कुशवाह वोटरों को साधने की है। दतिया विधानसभा सीट पर कुशवाह वोटरों की संख्या 30 हजार से उपर है। बताया जाता है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कुशवाह वर्ग की नाराजगी का खामियाजा ही नरोत्तम मिश्रा को उठाना पड़ा था और वह चुनाव हार गए थे। चुनाव के बाद कुशवाह वर्ग को साधने के लिए नरोत्तम मिश्रा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कुशवाह वर्ग से आने वाले रघुवीर कुशवाह को भाजपा जिला अध्यक्ष बनवाया। दतिया में इसके साथ यादव और जाटव समुदाय के वोटरों को रिझाना भी बड़ी चुनौती है।

राजेंद्र भारती की सदस्यता क्यों हुई खत्म?-कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को जिस मामले में सजा मिली है वह पूरा मामला 27 साल पुराना  साल 1998 का है,जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम पर संचालित एक संस्थान की 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी, जिस पर तत्कालीन ब्याज दर 13.5 प्रतिशत थी। बाद में जब बैंक ने ब्याज दरें कम कर दीं, तब राजेंद्र भारती ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के तत्कालीन लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में काट-छाँट की और एफडी की समय सीमा को बढ़ाकर 15 साल कर दिया, जिससे पुरानी ब्याज दर का लाभ मिलता रहे।

इस मामले का खुलासा साल 2011 में हुआ जब बैंक के तत्कालीन प्रशासक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की मांग की। हालांकि पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने पर मामला जिला न्यायालय और फिर उच्च न्यायालय तक पहुँचा। बाद में राजेंद्र भारती की मांग को पूरे मामले को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर किए है। गुरुवार को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने बैंक एफडी हेराफेरी और जालसाजी के  मामले में 3 साल की सजा सुनाई है।  कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को दो धराओं में 3--3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। हलांकि कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को जमानत भी दे दी थी। कोर्ट के फैसले के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी और अब दतिया में उपचुनाव होने जा रहा है।
 

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