Hanuman Chalisa

व्यंग्य : ‘जियो’ खुल के माल पियो

Webdunia
लेखक एम.एम चन्द्रा 
 
मामा जी! बोलो भांजे! क्या हाल है? मामा जी! हाल बेहाल है, दिल कंगाल है, बिल मालामाल है, आपके रहते बाकी सब हलाल हैं, करना सबको कंगाल है। यह सब आपकी सरकार का कमाल है।

भांजे! जब सबसे दुश्मनी करके तुमको तन-मन सब कुछ दे ही दिया है, तो थोड़ा पार्टी-वार्टी के लिए भी फंड दिया करो। सरकार कैसे चलेगी?
मामा जी! चुनाव में आपको ही नहीं विपक्ष को भी खूब खिलाया-पिलाया। पैसों से खूब नहलाया, चुनाव आने तक तो इंतजार करो। पिछला जो दिया, उसे तो पूरा करने दो। हम कोई धर्मशाला नहीं चलाते कि ‘जियो’ और जीने दो, हमारा एक ही वाक्य है खुद ही 'जियो' और खुद ही सारा माल पियो। बात न बने तो विदेश में जी भर कर ‘जियो’।
 
भांजे! ऐसा नहीं लगता कि आप बहुत ही छोटी-सी कीमत पर बहुत ज्यादा वसूल रहे हो। फिर तुमने तो भविष्य के सारे इंतजाम कर लिए हैं। हमारी सरकार रहे न रहे, तुम रहोगे यहां। नहीं तो कहीं और कुछ तो राजनीति की नैतिकता का ख्याल करो।
 
मामा जी! व्यापार की एक ही नैतिकता होती है - लाभ, लाभ और लाभ। आपको क्या लगता है, हम जनता को फ्री में ‘जियो’ सिखा रहे हैं। जमीन फ्री की, बैंक से पैसा फ्री का, न चुकाओ तो कर्ज सरकार का। जल, जंगल जमीन सब हमारी है। आपकी बस सरकार है वह भी हमारे चंदे से चलने वाली।
 
ये जान लो मामाजी! अब ‘जियो’ के मामा की सरकार है। अब हम किसी को भी हड़का सकते हैं। जब थानेदार अपना हो तो डर काहे का और फिर जब मामाजी ने अपना हाथ भांजे पर रख ही दिया है तो आराम से कम से कम पांच साल तक तो वारे-नारे करने दीजिए। जब सरकार चली जाएगी तो विदेश तो है ही सेटल होने के लिए। हमारे सभी भाई बंधु है वहां पर और आज वैसे भी दुनिया एक ग्लोबल गांव ही तो है।
 
मामाजी! आज मोनोपोली का जमाना है, चाहे राजनीति में हो या अर्थनीति में। इसलिए स्पेक्ट्रम नीलामी में सारी कंपनियों ने जितना पैसा जमा कराया है उससे ज्यादा ‘जियो’ ने दिया है आपकी सरकार को। बाजार में अपनी मजबूत स्थिति के लिए 'गैर प्रतिस्पर्धी व्यवहार' तो करना ही पड़ता है। जैसे आप समय-समय पर सरकार की उपस्थिति को दिखाने के लिए गैर संसदीय भाषा का प्रयोग करते हैं।
 
भांजे! तुम अन्य व्यापारियों के साथ भी तो ज़बानी जंग कर रहे हो। इससे तो तुम्हारा नुकसान होगा।
मामा जी ! आप भी तो अपने विपक्षी लोगों से जूबानी जंग लड़ते हो, उससे क्या फायदा होता है आपका और आपकी सरकार का।
 
भांजे! हमारी तो मजबूरी है, जब हम अपने किए वादे नहीं निभाते तो हमें किसी छद्म मुद्दे को उठाना पड़ता है, पचास-सौ लोगों की जान भी लेनी पड़ती है। ये सब सरकार के नुख्से हैं, जो हर सरकार अपनाती है।
 
मामाजी ! जब व्यापारी लोग जबानी जंग लड़ते है तो उनका भी एक ही मकसद होता है अपने मुनाफे को बचने के लिए जनता को किसी अन्य मुद्दे पर लाना ताकि मुनाफे पर किसी की नजर भी न पड़े।
 
तो भांजे जाओ, जी भर के ‘जियो’ खुल के माल पियो। जब तक मामा की सरकार है तुम पर आंच नहीं आ सकती। चाहे किसी भी मंत्रालय को कुर्बान करना पड़े। आखिर देश के विकास का सवाल है। जय हो मामाजी की, जय हो मामा सरकार की।
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

घर की 'एनर्जी' बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय

सभी देखें

नवीनतम

Monsoon Glow Secrets: उमस भरे मौसम में भी चेहरे पर रहेगा पार्लर जैसा निखार, नोट कर लें ये नेचुरल स्किन केयर टिप्स

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

अगला लेख