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कैसे पारदर्शी होगा मंदिरों के चढ़ावे का प्रबंधन

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प्रभाकर मणि तिवारी
भारत के कई मंदिरों के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों के बीच हिमाचल और कर्नाटक सरकार ने मंदिरों में दान के सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। क्या इससे चोरी रुकेगी? ALSO READ: भारत में इंजीनियर बनने का सपना फीका क्यों पड़ रहा है?
 
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामल में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। यह घटना भारत की राजनीति में भी कई दिनों तक मुद्दा बनी रही। इसके बाद उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। सरकार ने इसकी उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया है। इस मामले में भी मंदिर समिति के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
 
इन मामलों के बाद अब देश के कुछ राज्य मंदिरों के चढ़ावे पर निगरानी बढ़ाने और पारदर्शिता के साथ इसके प्रबंधन की दिशा में पहल कर रहे हैं। इस सप्ताह हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक ने इसके लिए कदम उठाए हैं।
 

पारदर्शिता के लिए एसओपी

कर्नाटक में लागू मानक संचालन प्रक्रिया के तहत मुजरई यानी हिन्दू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के तहत आने वाले मंदिरों में दान पेटियों की सीसीटीवी कैमरे से चौबीसों घंटे निगरानी अनिवार्य कर दी गई है। सरकार मंदिरों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाएगी।
 
कर्नाटक में राजस्व सचिव राजेंद्र कुमार कटारिया की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, "दान के लिए मंदिरों में जगह-जगह क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फीड को मुजरई विभाग और स्थानीय पुलिस थाने से जोड़ा जाएगा।"
 
सरकार ने कहा है कि दानपात्र से चढ़ावे की रकम या वस्तुएं निकालने से लेकर उनकी गिनती पूरी होने और उसे वापस रखने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग की जाएगी। चढ़ावे की रकम की गिनती के लिए सिर्फ सरकारी और बैंक कर्मचारियों के अलावा होमगार्ड की जवानों को ही काम पर लगाया जाएगा। चोरी की किसी भी घटना के लिए संबंधित मंदिरों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
 
एसओपी के मुताबिक, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक और जिला शासक हर महीने विभागीय सचिव और पुलिस महानिदेशक को निगरानी की रिपोर्ट भेजेंगे।
 
सरकारी आदेश में कहा गया है कि तहसीलदारों और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में नियमित रूप से दान पात्र में जमा रकम की गिनती की जाएगी। बड़े मंदिरों में यह गिनती साप्ताहिक होगी जबकि छोटे मंदिरों में पंद्रह दिनों में। इसके अलावा सोना, चांदी और दूसरी कीमती वस्तुओं का मूल्यांकन करने के बाद उनको उसी दिन सरकारी खजाने या इलाके की ट्रेजरी में जमा करना अनिवार्य होगा। ALSO READ: एआई प्रेमियों से बिछड़ने के गम में डूबे चीन के यूजर
 

एसओपी की जरूरत क्यों?

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद किया गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पिछले सप्ताह ही अधिकारियों को हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती (मुजरई) विभाग के सभी बड़े मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया था। 
 
राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू बताया, "मंदिरों में हुंडी के पैसों और आभूषणों की गिनती के दौरान हेराफेरी या चोरी की शिकायतें पहले से मिलती रही हैं। अब अयोध्या और बद्रीनाथ धाम के मामले सामने आने के बाद सरकार ने कई स्तर की बैठक के बाद यह एसओपी तय किया है। इसे तुरंत प्रभाव से ही लागू किया जा रहा है।"
 
कर्नाटक में मुजरई विभाग के प्रबंध वाले 35 हजार से ज्यादा मंदिरों को उनकी सालाना आय के मुताबिक तीन वर्गो में बांटा गया है। इनमें से 25 लाख या उससे ज्यादा आय वाले मंदिर 'ए' वर्ग में हैं। पांच से 25 लाख की आय वाले मंदिर 'बी' वर्ग में है और पांच लाख से कम वाले 'सी' वर्ग में। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के 11 प्रमुख मंदिरों को हर साल चढ़ावे से छह सौ करोड़ से ज्यादा की कमाई होती है। इनमें से अकेले कुक्के सुब्रह्मण्यम मंदिर में ही सालाना डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा का चढ़ावा आता है। ALSO READ: पर्यावरण संरक्षण में क्यों पिछड़ रहा है भारत
 

हिमाचल सरकार ने भी बनाए नियम

इससे एक दिन पहले हिमाचल सरकार ने भी ऐसी ही एसओपी जारी की थी। इसके तहत तमाम मंदिरों में रखे जाने वाले नए दान पात्रों से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। हर दान पात्र की पहचान के लिए एक खास नंबर आवंटित किए जाएंगे। उनको खोलने के लिए एक से ज्यादा चाबियों की जरूरत होगी जो अलग-अलग लोगों के पास रहेंगी।
 
सरकार के मुताबिक, यह दानपात्र पहले से तय तारीख को ही खोले जा सकेंगे। उस दौरान मंदिर प्रबंधन के अलावा जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और स्वतंत्र गवाह मौजूद रहेंगे। चढ़ावे की रकम की गिनती की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी की निगरानी में होगी और इसकी वीडियो रिकार्डिंग की जाएगी। ALSO READ: चीन के मिसाइल परीक्षण से किन देशों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ी
 

एसओपी से लगेगा हेराफेरी पर अंकुश?

क्या सरकार की ओर से तय इस नए एसओपी से चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी पर अंकुश लगाया जा सकेगा? जानकारों का कहना है कि कागज पर तो यह नियम बेहद प्रभावी नजर आते हैं। लेकिन इसके लागू होने के कम से कम छह महीने बाद ही इसके असर का पता चलेगा।
 
राजधानी बेंगलुरु के एक मंदिर के पुजारी मुरली देव डीडब्ल्यू से कहते हैं, "राज्य के मंदिरों में चढ़ावे की रकम में हेराफेरी या चोरी के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। लेकिन अब अयोध्या की घटना के बाद सरकार ने नई एसओपी तय की है। इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही तय की गई है। शायद इसे लागू करने के बाद ऐसी शिकायतों पर अंकुश लग सकेगा।"
 
बेंगलुरु के मशहूर गली अंजनेय मंदिर में पूजा के लिए आने वाली एक महिला श्रद्धालु एम। विजयलक्ष्मी ने डीडब्ल्यू से कहा, "यह अच्छा है।चढ़ावे की रकम की चोरी से हमारी आस्था को ठेस पहुंचती है। इसे पूरी तरह रोका जाना चाहिए। अब नए नियम से शायद इसमें कामयाबी मिलेगी।"
 
हालांकि कुछ लोग शंकित भी हैं। राज्य के वरिष्ठ पत्रकार एम गुरुस्वामी डीडब्ल्यू से कहते हैं, "देखते हैं आगे क्या होता है? नियम हमेशा सही होते हैं। लेकिन उसे लागू करने वाली की मंशा भी सही होनी चाहिए। उसी स्थिति में अपेक्षित नतीजे सामने आएंगे।"

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