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लाल किताब : किस तरह होता है आप पर ग्रह-नक्षत्रों का असर, जानिए

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Lal kitab
धरती पर अलग-अलग स्थानों पर ग्रह नक्षत्र अपना अपना प्रभाव डालते हैं जिसके चलते भिन्न-भिन्न प्रकार की प्रजातियां, पेड़-पौधे और खनिजों का जन्म जन्म होता है। उसी तरह प्रत्येक ग्रह शरीर पर भी नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। यदि आप यह जान लेते हैं कि आपका कौन सा अंग-खराब हो रहा है तो यह भी जान लेंगे कि वह किस ग्रह से प्रभावित होकर ऐसा हो रहा है तो निश्चित ही आप उस ग्रह के उपाय कर पाएंगे। तो आओ जानते हैं कि कौन सा ग्रह शरीर के किस अंग पर अपना प्रभाव डालता है।
 
 
शरीर में ग्रह :
1. शरीर में मस्तक के बीचोबीच सूर्य का, नेत्रों में मंगल का, जिभ और दांत पर बुध का, वीर्य पर शुक्र का, नाभि पर शनि का, सिर और मुख पर राहु का, कंठ से लेकर हृदय तक एवं पैरों पर केतु का, हृदय पर चंद्र का और रक्त पर मंगल का प्रभाव पड़ता है। 
 
2. इसी तरह यदि हम देखें तो शरीर के भीतर जल पर चंद्र का, वायु पर गुरु का और हड्डी पर शनि का प्रभाव पड़ता है। 
 
3. इसी तरह हाथों में कनिष्ठा बुध की, अनामिका सूर्य की, मध्यमा शनि की, तर्जनी गुरु की और अंगुठा शुक्र का है। अंगुठे के नीचे का स्थान भी शुक्र का है। अंगुलियों के प्रत्येक पोरे राशियों के स्थान है। चारों अंगुलियों में 12 पोर होते हैं। 
 
इसीलिए शरीर को स्वस्थ रखना इसीलिए जरूरी है कि ग्रहों का आप पर विपरित असर न हो। अब जानिए विस्तार से...
 
सूर्य- शरीर में मस्तक के बीचोबीच सूर्य का स्‍थान है। सूर्य का प्रभाव मस्तिष्क और हमारी बुद्धि पर रहता है। सूर्य हमारी अस्थि, अग्नाशय, मस्तक, नेत्र और हृदय पर भी प्रभाव डालता है।
 
चंद्र- हृदय और शरीर के जल पर चंद्र का प्रभाव रहता है। इससे हमारा मन प्रभावित होता है। यह कल्पना करना सीखाता है। चंद्र हमारी इच्छाशक्ति और फेफड़े भी प्रभावित करता है।
 
मंगल- नेत्रों और रक्त पर मंगल का प्रभाव रहता है। यदि यह दोनों अच्‍छे हैं तो मंगल भी अच्छा होगा। यह हमें साहस और निर्भिकता देते है। मंगल हमारे कंठ, सत्व, पराक्रम और गुदा को भी प्रभावित करता है।
 
बुध- जिभ, दांत और नासाग्र पर बुध का प्रभाव रहता है। इससे हमारी वाणी, व्यवहार और बुद्धि संचालित होती है। यह हमें योग्य और विद्यावान बनाता है। बुध हमारे पाचन तंत्र, त्वचा और वायु पर भी प्रभाव डालता है।
 
गुरु- नाक और शरीर की वायु पर गुरु का प्रभाव रहता है। शरीर में स्थित वायु अच्छी है तो ज्ञान और भाग्य दोनों ही अच्छे होंगे। गुरु हमारे ज्ञान, पित्त और चर्बी पर भी प्रभाव डालता है।
 
शुक्र- वीर्य, रस और त्वचा पर शुक्र का प्रभाव रहता है। यह अच्छा है तो व्यक्ति आकर्षक होगा साथ ही वह धन एवं स्त्री सुख भोगेगे। शुक्र हमारे गुप्तांग पर भी प्रभाव डालता है।
 
शनि- हड्डी और नाभि पर शनि का प्रभाव रहता है। शरीर में यदि हड्‍डी मजबूत नहीं रहेगी तो फिर कुछ भी सही नहीं रहेगा। नाभि हमारे जीवन का केंद्र है। शनि के अच्‍छा होने के अर्थ है कि व्यक्ति ज्ञानी और ध्यानी होगा। शनि हमारे घुटने, ऐड़ी, स्नायु और कफ पर भी प्रभाव डालता है।
 
राहु- सिर पर चोटी वाले स्थान और मुख पर राहु का असर होता है। राहु हमारी अंतड़ियों पर भी प्रभाव डालता है।
 
केतु- कंठ से लेकर हृदय तक एवं पैरों पर केतु का प्रभाव रहता है। यदि पैर कमजोर हैं। सड़पते रहते हैं तो केतु बेअसर होगा। यदि अच्छा है तो व्यक्ति रहस्यमयी विद्या में निणुण होगा। केतु हमारी अंतड़ियों पर भी प्रभाव डालता है।

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