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बाल कविता : अदला-बदली

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
आलू की चड्डी ढीली थी,
कुर्ता ढीला बैंगन का।
दोनों ही नाराज बहुत थे,
हुआ न कुछ उनके मन का।
 
कहा मटर ने अरे मूर्खों,
आपस में बदलो कपड़े।
ढीले-ढाले कपड़े पहने,
व्यर्थ रो रहे पड़े-पड़े।
 
अदला-बदली से दोनों को,
सच में मजा बहुत आया।
बैंगन को चड्डी फिट बैठी,
आलू को कुर्ता भाया।

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