बाल कविता जाने क्या सूझा सूरज को, जन-गण-मन पर हमला बोला। मार्च माह जाते-जाते ही, दाग दिया गर्मी का गोला। सर्र फर्राती हवा चल पड़ी। तीर चले अंगारों वाले। धरती हो गई गर्म तवे सी, पड़ने लगे पगों में छाले। मौसम के नीले सागर में इस निर्मम...