dharma sangrah

बाल कविता : कुछ न कुछ करते रहना है

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
खाली नहीं बैठना हमको,
कुछ न कुछ करते रहना है।
 
गरमी की छुट्टी में रम्मू,
प्यारे-प्यारे चित्र बनाता।
उन्हें बेचकर मजे-मजे से,
रुपए रोज कमाकर लाता।
इन रुपयों से निर्धन बच्चों,
की उसको सेवा करना है।
 
लल्ली ने गरमी की छुट्टी,
एक गांव में काटी जाकर,
कैसे पानी हमें बचाना,
लौटी है सबको समझाकर।
निश्चित इसका सुफल मिलेगा,
बूंद बूंद पानी बचना है।
 
उमर हुई अस्सी की फिर भी,
दादाजी सबको समझाते।
कचरा मत फेको सड़कों पर,
कचरा बीमारी फैलाते।
रोज बीनते कचरा पन्नी,
कहते हमें स्वस्थ रहना है।
 
 
कुछ न कुछ करते रहने से,
होती रहती सदा भलाई।
तन तो स्वस्थ रहा करता है,
मन की होती खूब सफाई। 
चिंता-फ़िक्र दूर होती है,
बहता खुशियों का झरना है।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

दादाजी की याद में पोती की पाती, पढ़कर आंखें भी नम होगी, उर्जा भी मिलेगी

क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस? जानिए इतिहास और इसका महत्व

अगला लेख