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बाल दिवस पर कविता: सृष्टि का संगीत हैं बच्चे

सुशील कुमार शर्मा
शुक्रवार, 14 नवंबर 2025 (15:21 IST)
प्यारे बच्चो तुम
धरती पर उतरी वह रोशनी हो
जो घर के हर अंधेरे को
छूते ही उजाला कर देती है।
 
तुम्हारी हंसी में
सरगम की पहली धुन बसती है
और तुम्हारी आंखों में
आकाश का सबसे भरोसेमंद नीला रंग।
 
तुम दौड़ते हो
तो हवा में नई आशाएं भर जाती हैं,
तुम गिरते हो
तो दुनिया को गिरने से बचाने का
पहला साहस मिलता है।
 
तुम्हारी हथेलियां
छोटी सही
पर भविष्य का सबसे बड़ा घर
इन्हीं में बसता है।
 
तुम्हारे सपने
किसी पाठ्यपुस्तक का अध्याय नहीं,
जीवन के लिए
नई कविता का मंत्र हैं।
 
ईश्वर ने जब मनुष्य को
सबसे सुंदर उपहार देना चाहा,
तो उसने सिर्फ इतना कहा कि
बच्चों को जन्म लेने दो
यही दुनिया को बचाएंगे।
 
तुम्हारी मासूमियत
हमारी थकी हुई आत्मा के लिए
एक मधुर विश्राम है,
तुम्हारी बातें
दिन की थकान पर रखी
एक मुलायम रजाई हैं।
 
आज बाल दिवस पर
बस इतना कहना है
तुम हंसते रहो
क्योंकि तुम्हारी हंसी में
हम सबका जीवन छिपा है।
 
तुम खिलते रहो
क्योंकि तुम्हारे खिलने से ही
हमारा कल फलता है।
 
और हम बड़े
अपने भीतर बस यह संकल्प रखें
कि तुम्हारी उजली आंखों से
कभी भी
सपनों का सूरज ढलने न पाए।
 
बाल दिवस की कोमल,
स्नेहभरी शुभकामनाएं
प्रत्येक नन्हे प्रकाश को।

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