Hanuman Chalisa

फनी बाल कविता : ले गए पेड़ लुटेरे

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
मैं हूं नन्हीं परी, बगल में,
पंख छुपे हैं मेरे।
आसमान से उड़कर आई,
बिलकुल सुबह सवेरे।
मंजन ब्रश मैं भूल आई हूं,
दांत घिसूं मैं कैसे।
कैसे यह सामान खरीदूं,
नहीं जेब में पैसे।
नहीं अभी तक मुंह धो पाई,
इससे आलस घेरे।
कच्चे दांत दूधवाले हैं,
कैसे मैं चमकाऊं
सोच रही हूं नीम वृक्ष से,
दातुन लेकर आऊं।
नहीं दिख रहे नीम वृक्ष पर,
लगा लिए कई फेरे।
अगर नीम के पेड़ कहीं,
दो चार मुझे मिल जाते।
आसमान से रोज उतरकर,
दातुन लेने आते।
पता नहीं कब लूट यहां से,
ले गए पेड़ लुटेरे।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

भीषण गर्मी और जंगल की आग से झुलसता यूरोप, 40 डिग्री के पार हो सकता है तापमान

उधमसिंह शहीद दिवस पर जानें इस वीर क्रांतिकारी के बारे में 10 अनसुने तथ्य

उजाले उनकी यादों के: डॉ. बशीर बद्र

मध्य प्रदेश में पुनर्जीवित हो रही गुरुकुल की सनातन परंपरा

अगला लेख