suvichar
✕

बाल कविता : बारह मासा

Webdunia
- मोहिनी गुप्ता
 
प्रथम महीना चैत से गिन
राम जनम का जिसमें दिन।।
 
द्वितीय माह आया वैशाख।
वैसाखी पंचनद की साख।।
 
ज्येष्ठ मास को जान तीसरा।
अब तो जाड़ा सबको बिसरा।।
 
चौथा मास आया आषाढ़।
नदियों में आती है बाढ़।। 
 
पांचवें सावन घेरे बदरी।
झूला झूलो गाओ कजरी।।
 
भादौ मास को जानो छठा।
कृष्ण जन्म की सुन्दर छटा।। 
 
मास सातवां लगा कुंआर।
दुर्गा पूजा की आई बहार।। 
 
कार्तिक मास आठवां आए।
दीवाली के दीप जलाए।।
 
नवां महीना आया अगहन।
सीता बनीं राम की दुल्हन।। 
 
पूस मास है क्रम में दस।
पीओ सब गन्ने का रस।।
 
ग्यारहवां मास माघ को गाओ।
समरसता का भाव जगाओ।। 
 
मास बारहवां फाल्गुन आया।
साथ में होली के रंग लाया।। 
 
बारह मास हुए अब पूरे।
छोड़ो न कोई काम अधूरे।। 
 
साभार- देवपुत्र  

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख