गर्मी हो या जाड़े जी, हमने पढ़े पहाड़े जी। सुबह-सुबह रट्टा मारा, गिनती सौ तक पढ़ डाली। फिर सीखी उलटी गिनती, सौ से ज़ीरो तक वाली। पन्ने ढेरों लिख डाले, लिख-लिख कर कई फाड़े जी। दो से लेकर दस तक के, पढ़े पहाड़े बीसों बार। शाम ढले...