Publish Date: Friday, 30 January 2026 (17:42 IST)
Updated Date: Friday, 30 January 2026 (01:44 IST)
कुछ घंटे जुड़वा दें, दिन में
कुछ घंटे बढ़वा दें रात।
किसी तरह से क्यों न बापू,
बड़े-बड़े कर दें दिन-रात।
छोटे-छोटे दिन होते हैं,
छोटी-छोटी होती रात।
ना हम चंदा से मिल पाते,
ना सूरज से होती बात।
नहीं जान पाते हैं अम्मा,
क्या होती तारों की जात।
ना ही हमें पता लग पाता,
अंबर की कितनी औकात।
मां बोली ईश्वर की रचना,
सुंदरतम अद्भुत सौगात।
कभी नहीं दे पाएंगे हम,
उसकी मौलिकता को मात।
बापू बोले सदा प्रकृति ने,
हमको दिया समय पर्याप्त।
हम ही ना सूरज चंदा को,
तारों को कर पाते ज्ञात।
एक-एक पल है उपयोगी,
एक-एक कण है सौगात।
यदि समय श्रम का नियमन हो,
हम सब कुछ कर सकते प्राप्त।
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