कौआ बोला कांव-कांव जी बार-बार बस कांव-कांव जी। बोली मुन्नी, छत पर चलना, मुझे अभी कौए से मिलना। कौआ सोता कहां बताओ? कथा अभी उसकी सुनाओ जी। कौआ सुबह-सुबह क्यों आता? खुद का घर क्यों नहीं बनाता? अपनी मां से लड़ता है क्या, बात मुझे सच्ची बताओ जी।...