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बाल गीत : चलो खेत में महुए बीने

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
बुधवार, 23 अप्रैल 2025 (13:46 IST)
दबा बगल में एक टोकनी,
चलो, खेत में महुए बीने।
 
टप-टप, रोज टपकते महुए,
सोने की चादर बिछ जाती।
सूरज की किरणें पड़ती तो 
मारे लाज सिकुड़ सी जाती।
जल्दी उठ री चलकर देखें,
मीठे महुए रस से भीने।
 
दुलराती है हवा सबेरे,
नाच दिखते पत्ते डाली।
हम जल्दी से पहुंच वहां पर,
भर लें अपनी झोली खाली।
गोल अंगूठी जैसे महुए,
गिरते, जैसे पीत नगीने।
 
बड़े-बड़े सोने के मोती,
गप्प-गप्प कर कुछ खा लेंगे।
किशमिश जैसे होते मीठे,
इनका स्वाद आज हम लेंगे।
कल मैं जो महुए लाई थी,
भैया ने थे सारे छीने।
 
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