दबा बगल में एक टोकनी, चलो, खेत में महुए बीने। टप-टप, रोज टपकते महुए, सोने की चादर बिछ जाती। सूरज की किरणें पड़ती तो मारे लाज सिकुड़ सी जाती। जल्दी उठ री चलकर देखें, मीठे महुए रस से भीने। दुलराती है हवा सबेरे, नाच दिखते पत्ते डाली। हम...