Poem on Kids सुबह-सुबह से सूरज निकला, खिड़की में से भीतर आया। बोला उठो-उठो अब जल्दी, क्यों सोए अब तक महाराजा। मैं बोला मैं महाराजा हूं, तो तुम खिड़की से क्यों आए, चौकीदार खड़ा द्वारे पर, उसे बताकर क्यों न आएं? आ गए हो चौका बर्तन,...