Hanuman Chalisa

करवा चौथ 2019 पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त यहां मिलेगा, 1 घंटे 15 मिनट तक रहेगा सबसे शुभ समय

Webdunia
करवा चौथ कार्तिक मास की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 17 अक्टूबर 2019 को है। इस बार करवा चौथ पर एक विशेष संयोग बन रहा है। यह संयोग पूरे 70 साल बाद बन रहा है। इस बार 17 अक्टूबर को 6:48 पर चतुर्थी तिथि लग रही है। अगले दिन चतुर्थी तिथि सुबह 7:29 तक रहेगी।
 
यह विशेष व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करती हैं। इस दिन व्रत में सुबह सरगी खाई जाती है।
 
इस बार उपवास का समय 13 घंटे 56 मिनट का है। सुबह 6:21 से रात 8:18 तक। इसलिए सरगी सुबह 6:21 से पहले ही खा लें।
 
वर्त में पूरे दिन निर्जला व्रत रख कर महिलाएं शाम को चांद को अर्घ्य देकर व्रत को तोड़ती हैं। इस बार चांद 8:18 पर निकलेगा। व्रत की कहानी सुनने और पूजा का समय शाम 5:50 से 7:06 तक सबसे अच्छा है।
 
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कुल मिलाकर 1 घंटे 15 मिनट का है।
 
शाम 5:50 से 7:06  तक
ये मुहूर्त 1 घंटे 15 मिनट का है।
 
उपवास का समय
 
सुबह 6:21 से रात 8:18 तक
उपवास का समय 13 घंटे 56 मिनट है।
 
सामान्य रूप  से देश भर में चांद निकलने का समय: 8:18 रात
 
इस बार रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग होना अधिक मंगलकारी बना रहा है। यह योग बहुत ही मंगलकारी है और इस दिन व्रत करने से सुहागिनों को व्रत का फल मिलेगा। इस दिन चतुर्थी माता और गणेश जी की भी पूजा की जाती है।  
 
इस दिन सुहागिन स्त्रियां व्रत रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है और उनका गृहस्थ जीवन सुखमय होता है। वैसे तो पूरे देश में इस त्योहार को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं लेकिन उत्तर भारत खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश आदि में इसका अतिरिक्त महत्व है।

ALSO READ: करवा चौथ व्रत की सरल विधि, कैसे करें उपवास और कैसे करें पारण

 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

आदि शंकराचार्य का काल निर्धारण: 508 ईसा पूर्व या 788 ईस्वी में हुए थे शंकराचार्य?

अचानक बदलने वाली है इन 5 राशियों की तकदीर, ग्रहों का बड़ा संकेत

नास्त्रेदमस को टक्कर देते भारत के 7 भविष्यवक्ता, जानें चौंकाने वाली भविष्यवाणियां

मांगलिक दोष और वैवाहिक जीवन: क्या वाकई यह डरावना है या सिर्फ एक भ्रांति?

करियर का चुनाव और कुंडली का दसवां भाव: ग्रहों के अनुसार चुनें सही कार्यक्षेत्र

सभी देखें

धर्म संसार

बुद्ध पूर्णिमा का पर्व कब मनाया जाएगा, क्या है इसका महत्व?

श्री कुलदेवी स्तोत्रम् | Shri kuldevi stotram

सीता माता चालीसा | Sita Mata Chalisa

Janaki jayanti: माता सीता की पूजा विधि, आरती, चालीसा और लाभ

मेष राशि में बुध का गोचर, 5 राशियों को मिलेगा नौकरी और व्यापार में लाभ

अगला लेख