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हनुमान जयंती : कौन है खेड़ापति सरकार, जानिए

अनिरुद्ध जोशी
मंगलवार, 7 अप्रैल 2020 (10:35 IST)
हनुमान जयंती के उपलक्ष में आज हम आपको बताने जा रहे हैं खेड़ापति सरकार का रहस्य। आखिर कौन है खेड़ापति सरकार और क्या महत्व है उनका जानिए एक अद्भुत रहस्यमयी जानकारी।
 
 
खेड़ा का अर्थ होता है काकड़। काकड़ का अर्थ होता है मेड़। मेड़ का अर्थ होता है सीमा। सीमा जैसे नगर सीमा, ग्राम सीमा या देश की सीमाएं। ऊर्दू में इसे सरहद कहते हैं और अंग्रेजी में बार्डर।
 
 
पौराणिक काल में ग्राम या नगर की सीमा पर सीमा की रक्षा हेतु क्षेत्रपाल और खेड़ापति देव की स्थापना की जाती थी। क्षेत्रपाल के रूप में भगवान भैरव का रूप और खेड़ापति के रूप में रामभक्त हनुमान की स्थापना की जाती है।
 
 
उत्तर भरत के अधिकतर गांवों में भैरवनाथ, खेड़ापति (हनुमानजी), सतीमाई, कालीमाई, सीतलामाई और क्षेत्रपाल आदि के मंदिर होते हैं। यह सभी ग्राम देवता होते हैं और सभी के अलग-अलग कार्य माने गए हैं।
 
 
क्षेत्रपाल भी भगवान भैरवनाथ की तरह दिखाई देते हैं संभवत: इसीलिए बहुत से लोग क्षेत्रपाल को कालभैरव का एक रूप मानते हैं। लोक जीवन में भगवान कालभैरव को क्षेत्रपाल बाबा, खेतल, खंडोवा, भैरू महाराज, भैरू बाबा आदि नामों से जाना जाता है। अनेक समाजों के ये कुल देवता हैं।
 
 
संपूर्ण गांव मिलकर इन देव की विधिवत रूप से प्राण प्रतिष्ठा करके यह प्रार्थना की जाती थी कि यह देव हमारे ग्राम या नगर को प्राकृतिक आपना, बुरी शक्तियों और महामारी आदि से बचाएं। कई जगह तो खेड़ापति सरकार की प्रतिका स्वयंभू है। अर्थात मान्यता अनुसार वे खुद ही गांव की सीमा पर प्रकट हुए हैं।
 

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