Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

क्या हैं AI डेटा सेंटर और क्यों हो रहा है इनका विरोध?

Advertiesment
AI data center
लेखक – विनम्र मिश्रा (डेटा इंजीनियर, मुंबई)
 
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में जितनी चर्चा एआई (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर हुई है, शायद ही किसी और तकनीक पर हुई हो। लेकिन बीते कुछ महीनों से डेटा सेंटर का विषय अधिक चर्चा में है, जिस पर आज की यह एआई तकनीक और इसका भविष्य टिका हुआ है। दुनिया भर में एआई डेटा सेंटरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
 
लोगों का दावा है कि ये डेटा सेंटर पर्यावरण के लिए खतरा बनकर उभर रहे हैं। बीते कुछ महीनों में अमेरिका और यूरोप के कई देशों में डेटा सेंटर के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए हैं। हाल ही में अमेरिकी संसद में सांसद अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ ने जॉर्जिया प्रांत के एक डेटा सेंटर के कारण स्थानीय लोगों को होने वाली समस्याओं को उजागर किया है। आइए, आज इस विषय को विस्तार से समझते हैं।
 

क्या है डेटा सेंटर?

डेटा सेंटर को आप एक ऐसे विशाल ढांचे या इमारत के रूप में देख सकते हैं, जहाँ हजारों सर्वर या कंप्यूटर रखे होते हैं। आप जिस भी एआई टूल का इस्तेमाल करते हैं, उसके पीछे का पूरा दिमाग इन्हीं सर्वर्स को समझिए। जाहिर है, दिमाग चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार, ये सर्वर भी भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। आज तेजी से काम करने वाले आधुनिक सुपरकंप्यूटर, जिन पर एआई काम करता है, वे आपके सामान्य कंप्यूटर से कई गुना अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। जिस एआई तकनीक का आज हम उपयोग कर रहे हैं या आगे करेंगे, उसके लिए एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों और हजारों सर्वर्स की जरूरत होती है।
 

क्यों बढ़ रही है लोगों की चिंता?

ये कंप्यूटर न केवल अत्यधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि काम करते समय गर्मी (Heat) के रूप में भारी ऊर्जा बाहर भी निकालते हैं। यह बिल्कुल वैसे ही है, जैसे कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद आपका कंप्यूटर या स्मार्टफोन थोड़ा गर्म हो जाता है। इसे आप स्कूल या कॉलेज की कंप्यूटर लैब के उदाहरण से भी समझ सकते हैं।
 
कंप्यूटर लैब में जहाँ कई कंप्यूटर होते हैं, वहाँ उनसे निकलने वाली गर्मी इतनी अधिक हो सकती है कि वह कंप्यूटर के हार्डवेयर को नुकसान पहुँचा दे। इसीलिए कंप्यूटर लैब को हमेशा वातानुकूलित (Air Conditioned) रखा जाता है।
 
इसी प्रकार, बड़े डेटा सेंटरों में इतनी भीषण गर्मी पैदा होती है कि वह सर्वर्स के हार्डवेयर को जलाकर नष्ट कर सकती है। ऐसे में उन्हें ठंडा रखना बेहद जरूरी होता है। डेटा सेंटर के स्तर पर केवल एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल करने से बिजली की खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसी कारण कई डेटा सेंटर कूलिंग (ठंडा करने) के लिए पानी का उपयोग करते हैं। सर्वर्स के रैक (जहाँ कई सारे सर्वर रखे होते हैं) के पास से पानी की पाइपलाइन गुजारी जाती है, जो गर्मी सोखती है और बाद में यह गर्म पानी भाप बनकर उड़ जाता है।
 
डेटा सेंटरों को लगातार ठंडा रखने की इस प्रक्रिया में पानी की भारी बर्बादी होती है। उदाहरण के लिए, गूगल के डेटा सेंटरों द्वारा वर्ष 2022 में उपभोग किया गया 5.6 बिलियन गैलन (लगभग 2,120 करोड़ लीटर) पानी, भारत के किसी मध्यम आकार के शहर के लगभग 4.3 लाख लोगों की पूरे साल की पानी की जरूरत के बराबर है।
 

ध्वनि प्रदूषण भी है एक बड़ी समस्या

डेटा सेंटरों में बिजली और पानी की यह बेलगाम खपत कई जगहों पर स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। लोगों का विरोध है कि उनके हक का पानी और बिजली इन डेटा सेंटरों को दी जा रही है। लेकिन परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती; डेटा सेंटरों से निकलने वाली तेज आवाज (ध्वनि) भी एक बड़ी समस्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेटा सेंटरों से लगातार एक कम आवृत्ति वाली (Low-Frequency) भारी आवाज निकलती रहती है, जिससे आसपास के घरों में कंपन महसूस होता है। 'अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन' ने भी माना है कि ऐसी लो-फ्रीक्वेंसी ध्वनि लगातार 24 घंटे सुनने के कारण हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
 
आज दुनिया भर में जहाँ एआई पर लोगों की निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है और टेक कंपनियाँ तथा सरकारें एआई की इस अंधी दौड़ में भाग रही हैं, ऐसे में डेटा सेंटरों को लेकर आम जनता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों की शिकायत बिल्कुल जायज है कि सरकारें और बड़ी कंपनियाँ विकास की आड़ में पर्यावरण के नियमों को नजरअंदाज कर रही हैं।
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

ISRO में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के इस्तीफों से हलचल, सरकार ने सख्त किए नियम, Gaganyaan Mission से जुड़े कर्मियों पर विशेष फोकस