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Google Chrome यूजर्स सावधान! सरकार का हाई-रिस्क अलर्ट, तुरंत करें ये जरूरी काम

वेबदुनिया न्यूज डेस्क
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 (14:44 IST)
भारत में करोड़ों लोग इंटरनेट चलाने के लिए गूगल क्रोम नामक ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं। सरकारी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने गूगल क्रोम के यूजर्स को चेतावनी देते हुए कहा कि इस ब्राउजर में कई सिक्योरिटी खामियां मिली हैं। इसका फायदा उठाकर हैकर्स आपके सिस्टम की एक्सेस ले सकते हैं। इससे पर्सनल इंफोर्मेशन के साथ-साथ डेटा चोरी का भी डर बना हुआ है। 

गूगल क्रोम के इन वर्जन पर ज्यादा खतरा

CERT-In के अनुसारल अगर आप विंडोज या मैक पर गूगल क्रोम के 145.0.7632.75/76 से पुराने और Linux पर 144.0.7559.75 से पुराने वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। एजेंसी को क्रोम के इन वर्जनों में खामियां मिली हैं।
 
एजेंसी का दावा है कि क्रोम के CSS रेंडरिंग कंपोनेंट में ये खामियां पाई गई हैं। इनका फायदा उठाकर अटैकर्स ब्राउजर के अंदर मेमोरी हैंडलिंग को मैनिपुलेट कर सकते हैं। इससे पूरे सिस्टम की एक्सेस अपने हाथों में लेकर डेटा चोरी और सर्विस डिसरप्शन कर सकते हैं।

यूजर्स क्या करें?

एजेंसी ने इस वार्निंग को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा है। इससे निपटने के लिए यूजर्स को तुरंत क्रोम ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी गई है। यूजर्स गूगल स्टेबल चैनल के जरिए रिलीज हुई अपडेट को इंस्टॉल कर सकते हैं। इसमें इन खामियों को ठीक करने के लिए सिक्योरिटी पैचेज जारी किए गए हैं।
 
अगर यूजर्स समय समय पर अपने डिवाइस और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड करते हैं तो उन्हें साइबर अटैक से भी सुरक्षा मिलती है साथ ही नए फीचर्स भी मिलते हैं।

क्रोम यूजर्स कैसे डिलिट करें हिस्ट्री

नियमित रूप से हिस्ट्री डिलिट करना न सिर्फ प्राइवेसी के लिए अच्छा है। बल्कि इससे डिवाइस को तेज और सुरक्षित भी बनाए रखा जा सकता है। क्रोम यूजर्स अपनी ब्राउजिंग और डाउनलोड हिस्ट्री कुछ आसान स्टेप्स में डिलिट कर सकते हैं। जानिए कैसे डिलिट करें हिस्ट्री :
 
-ऊपर दाईं ओर तीन डॉट्स पर क्लिक करें
- History पर क्लिक करें और Delete browsing data पर जाएं
-समय सीमा चुनें- जैसे पिछला एक घंटा, 24 घंटे या पूरा डेटा।
-Delete Data पर क्लिक करें।

क्या है CERT-In

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत भारत की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है, जो 2004 से साइबर सुरक्षा खतरों, हैकिंग और फिशिंग से निपटने के लिए जिम्मेदार है। यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत साइबर हमलों की रोकथाम, चेतावनी और आपातकालीन प्रतिक्रिया का कार्य करती है। 
edited by : Nrapendra Gupta 

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