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आज के शुभ मुहूर्त

(होली-धुलेंड़ी पर्व)
  • तिथि- चैत्र कृष्‍ण एकम
  • अमृत काल: दोपहर 03:50 से शाम 05:35 तक
  • त्योहार/व्रत/मुहूर्त- होली (धुलेंड़ी)
  • राहुकाल: दोपहर 12:35 से 02:00 तक
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शब-ए-बरात क्या है? जानिए महत्व और 10 बातें

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Shabe Barat
Muslim
Shab E Barat 2022: मुस्लिमों का त्योहार है है शब-ए-बरात के दिन मुस्लिम लोग रातभर जागकर यह त्योहार मनाते हैं। आओ जानते हैं कि क्या है शब है बरात और क्यों मनाते है यह त्योहार।
 
 
1. शब का अर्थ होता है रात और बरआत का अर्थ होता है बरी होना। हिजरी कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद यह रात प्रारंभ होती है। रज्जब (सातवां) महीने के बाद शआबान (आठवां) महीना होता है।
 
2. इस्लाम धर्म के अनुसार यह बहुत ही फजीलत की रात मानी जाती है और इस रात को इस्लाम के मानने वाले दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं।
 
3. इस रात में इबादत और तिलावत का दौर चलता रता है। इस रात को लोग अपने उन परिजनों के लिए मगफिरत की दुआएं करते हैं जो कि इस दुनिया को छोड़कर चले गए हैं। उनकी कब्रों पर जाकर भी दुआएं की जाती है।
 
4. कहते हैं कि इस रात में सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करने और अपने पापों के लिए क्षमा मांगने से अल्लाह उन्हें माफ कर देते हैं।
 
5. कहते हैं कि इस रात खुदा की अदालत में पाप और पुण्य का निर्णय क्या जाता है और जहन्नुम में जी रहे उन लोगों को वहां से आजाद कर जन्नत भेज दिया जाता है जिनकी इबादत को स्वीकार कर लिया गया।
 
6. इस दिन के पूर्व मस्जिदों में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। शाम एवं रात की नमाज में लोग यहां आकर यहां इबादत करते हैं और साथ ह अपने-अपने बुजुर्गों के लिए फातिहा पढ़ते हैं।
 
7. इस दिन बहुत से लोग रोजा भी रखते हैं। रोजा यानी की नियमों के तहत उपवास रखते हैं। कहते हैं कि इस दिन रोजा रखने पुण्य मिलता है। हालांकि कुछ उलेमा इस बात से इत्तेफाक रखते हैं।
 
8. ऐसी मान्यता भी है कि शबे बरात के दिन से ही रूहानी साल की शुरुआत हो जाती है।
 
9. इस दिन किसी भी प्रकार की आतिशबाजी, शोर शराबा या जश्न नहीं किया जाता है, क्योंकि यह इबादत की रात होती है।
 
10. इस मुबारक रात में गुस्ल, अच्छे कपड़े पहनना, इबादत के सुरमा लगाना, मिसवाक करना, इत्र लगाना, कब्रो की जियारत करना, फातिहा दिलाना, खैरात करना, मगफिरत की दुआ करना, तहज्जुद की नमाज पढ़ना, नफिल नमाजें पढ़ना आदि कई पवित्र कार्य किए जाते हैं।

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