Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 (13:10 IST)
Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 (13:19 IST)
PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना के खिलाफ आम नागरिकों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच चुका है। बिजली-आटे की भारी किल्लत, सब्सिडी में कटौती और पाकिस्तानी सेना के दमन चक्र से तंग आकर अब स्थानीय लोगों ने भारत के साथ लगे बॉर्डर को खोलने की खुली मांग की है। 4 अक्टूबर को पाकिस्तान सरकार के लिए 'दोहरी मुसीबत' खड़ी हो गई है।
4 अक्टूबर को ईदगाह मैदान में बड़ी सभा होगी। इस दौरान आंदोलन को 'निर्णायक चरण' तक ले जाने के बारे में घोषणा की जाएगी। 4 अक्टूबर पाकिस्तान सरकार के लिए दोहरी मुसीबत लेकर आ रहा है। एक तरफ पीओके में बड़ी सभा होने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इसी दिन इमरान खान की पार्टी PTI भी इस्लामाबाद के लिए अपना बड़ा 'लॉन्ग मार्च' शुरू कर रही है।
पीओके में बिगड़ रहे हैं हालात
दरअसल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थितियां दिनों-दिन बिगड़ती जा रही हैं। पाकिस्तान की संघीय सरकार और सेना के अत्याचारों से तंग आकर स्थानीय अवामी एक्शन कमेटी और विभिन्न नागरिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। मंढोल, मुजफ्फराबाद, रावलकोट और पुंछ-हवेली जैसे सीमावर्ती इलाकों में विशाल जनसभाएं और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।
तारबंदी हटाने की मांग उठी
प्रदर्शन कर रहे स्थानीय नेताओं और नागरिकों का कहना है कि 1947 से पहले उनका मुख्य व्यापार और जीवन-यापन पुंछ, मेंढर और जम्मू-कश्मीर के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ था। पाकिस्तानी सेना ने सीमाबंदी और फेंसिंग करके उनके पारंपरिक रास्तों को पूरी तरह से रोक दिया है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके मौलिक अधिकारों, राशन की आपूर्ति और बुनियादी सुविधाओं को तुरंत बहाल नहीं किया गया, तो वे स्वयं LoC पर लगी तारबंदी को हटाने के लिए सीमा की ओर मार्च करेंगे ताकि वे भारत के नियंत्रण वाले कश्मीर से जरूरी सामान हासिल कर सकें।
क्यों भारत से जुड़ना चाहते हैं PoK के के लोग?
PoK के लोगों में भारत के जम्मू-कश्मीर को लेकर भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। धारा 370 हटने के बाद भारतीय कश्मीर में हो रहे रिकॉर्ड बुनियादी ढांचे के विकास, एम्स, आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों के निर्माण और शांति व्यवस्था की तुलना में PoK के लोग खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस्लामाबाद उनके प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जल विद्युत) का दोहन करता है, लेकिन बदले में उन्हें आटा और बिजली भी महंगी दरों पर दी जाती है।
विरोध प्रदर्शनों में सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना (Pak Army) और आईएसआई (ISI) की भूमिका को निशाना बनाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चेकिंग पोस्टों के नाम पर आम नागरिकों, व्यापारियों और युवाओं का उत्पीड़न किया जाता है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा बल प्रयोग की कोशिश की जा रही है, जिससे गुस्सा और भड़क गया है।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
PoK में गहराते आर्थिक संकट और बुनियादी मानवाधिकारों के हनन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों की भी नजरें टिकी हुई हैं। जानकारों का मानना है कि यदि पाकिस्तान सरकार ने स्थानीय आबादी की जायज मांगों को दबाने का प्रयास जारी रखा, तो सीमावर्ती इलाकों में यह जनांदोलन पाकिस्तान सरकार के नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो सकता है।