Publish Date: Sat, 03 Feb 2018 (16:06 IST)
Updated Date: Sat, 03 Feb 2018 (16:09 IST)
वॉशिंगटन। अमेरिका की एक पूर्व राजनयिक ने कहा है कि भारत और चीन के बीच शीतयुद्ध जैसे संबंध बन रहे हैं लेकिन बीजिंग को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाले किसी मोर्चे में नई दिल्ली के शामिल होने की उम्मीद नहीं है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण और मध्य एशिया ब्यूरो में काम कर चुकीं एलीजा आयर्स ने यह बात पिछले सप्ताह अपनी पुस्तक 'अवर टाइम हैज कम : हाऊ इंडिया इज मैकिंग इट्स प्लेस इन द वर्ल्ड' के विमोचन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि शीतयुद्ध जैसे संबंध बन रहे हैं। भारत और चीन के बीच मजबूत वाणिज्यिक संबंध हैं, लेकिन ये भारत के लिए ज्यादा संतोषजनक नहीं है और इन्हीं में से मिलते-जुलते अनेक ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से अमेरिका भी चीन के साथ व्यापार संबंधों से संतुष्ट नहीं है।
विदेश संबंध परिषद में वर्तमान में फैलो एलीजा ने भारत-चीन के बीच संबंधों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मेरा मानना है कि हिन्द महासागर में चीन जिस प्रकार से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और जिबूती में उसका अड्डा है, उससे भारत चिंतित है। इसके अलावा चीन के पाकिस्तान, श्रीलंका से बनते गहरे रिश्ते तथा वह दोनों देशों में जिस प्रकार से भारी निवेश कर रहा है, उससे भी भारत चिंतित हो सकता है।
अमेरिका में ऐसी धारणा कि बीजिंग को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली अच्छा विकल्प है, इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना कम है कि भारत ऐसी किसी भी पहल का हिस्सा बनेगा।
एलीजा ने कहा कि मेरा मानना है कि भारत, चीन को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी अगुवाई वाले किसी अभियान में शामिल नहीं होगा। भारत ऐसा नहीं करना चाहता। वह अपने हितों की रक्षा करना चाहता है। वह उदार विश्व व्यवस्था को बनाए रखना चाहता है। (भाषा)
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Publish Date: Sat, 03 Feb 2018 (16:06 IST)
Updated Date: Sat, 03 Feb 2018 (16:09 IST)