कश्मीर मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप के झूठ पर झुका अमेरिका, भारत की आपत्ति के बाद बताया द्‍विपक्षीय मुद्दा

Webdunia
मंगलवार, 23 जुलाई 2019 (08:59 IST)
वॉशिंगटन। कश्मीर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के झूठ पर भारत की आपत्ति के बाद अमेरिका झुक गया है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय मुद्दा बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है, इसे दोनों देशों को आपसी समन्वय से सुलझाना होगा। डोनाल्ड ट्रंप पर जम्मू-कश्मीर मुद्दे को लेकर दिए बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
 
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का दिवपक्षीय मुद्दा है। भारत और पाकिस्तान को मिलकर इस पर बात करनी होगी। अमेरिका इस बात का स्वागत करता है कि भारत और पाकिस्तान आपस में मिलकर यह मुद्दा सुलझाएं। हालांकि अमेरिका मदद करने को तैयार है। हम यह मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर पल रहे आतंक के खिलाफ कारगर कार्रवाई करें।

ट्रंप का बयान शर्मनाक, मांगें माफी : डेमोकेट्स सांसद ब्रैड शेरमैन ने ट्वीट करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया की राजनीति के बारे में अगर किसी शख्स के पास थोड़ी भी जानकारी होगी तो वो समझ जा सकता है कि भारतीय सरकार न तो इस तरह की सोच रखती है और न ही वे मध्यस्थता के बारे में सोचेगी। कम से कम पीएम मोदी इस तरह की बात नहीं करेंगे।
 
उन्होंने ट्रंप के बयान को गलत और शर्मनाक बताया। ब्रैड शेरमैन ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की इस तरह के बचकाने और शर्मनाक बयान के लिए भारतीय राजदूत हर्ष वी शिंगला से माफी मांगी है। इस तरह के बयान से भारत-अमेरिकी रिश्तों पर असर पड़ेगा। उन्होंने हैरानी जताई कि एक जिम्मेदार राष्ट्राध्यक्ष इस तरह की बात कैसे कर सकता है।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर पड़ सकता है असर : पूर्व राजनयिकों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर पड़ सकता है। भारत में स्थित अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने आज काफी नुकसान किया। कश्मीर और अफगानिस्तान पर उनके बयान बिलकुल गलत निशाने पर थे।

ट्रंप ने कहा था मोदी ने की थी मध्यस्थता की पेशकश : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि मोदी और उन्होंने पिछले महीने जापान के ओसाका में जी-20 शिखर सम्मेलन के इतर कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की थी, जहां मोदी ने उन्हें कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की पेशकश की थी।
 
ट्रंप ने कहा कि मैं दो सप्ताह पहले प्रधानमंत्री मोदी के साथ था और हमने इस विषय (कश्मीर) पर बात की थी और उन्होंने वास्तव में कहा कि ‘क्या आप मध्यस्थता या मध्यस्थ बनना चाहेंगे?’ मैंने कहा- ‘कहां?’ (मोदी ने कहा) ‘कश्मीर।’ उन्होंने कहा कि क्योंकि यह कई वर्षों से चल रहा है। मुझे आश्चर्य है कि यह कितने लंबे समय से चल रहा है।
 
डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ अपनी बैठक के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा था कि यदि मैं मदद कर सकता हूं, तो मैं एक मध्यस्थ होना पसंद करूंगा। अगर मैं मदद करने के लिए कुछ भी कर सकता हूं, तो मुझे बताएं।
 
ट्रंप के दावे पर भारत ने जताई थी आपत्ति : भारत ने डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को खारिज किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया। भारत का लगातार यही रुख रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों पर केवल द्विपक्षीय चर्चा होगी। पाकिस्तान के साथ किसी भी बातचीत के लिए सीमापार आतंकवाद पर रोक जरूरी होगी। भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों के समाधान के लिए शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र का अनुपालन आधार होगा।

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