Daily Horoscope
✕

आखिर क्यों इस मजहब के लोग बड़ी संख्या में त्याग रहे हैं अपना धर्म, चौंकाने वाली है वजह

WD Feature Desk
शनिवार, 24 मई 2025 (14:00 IST)
why people change their religion: दुनियाभर में सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक परिवर्तन लगातार हो रहे हैं। इन बदलावों का प्रभाव धर्म और आस्था पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। हाल के वर्षों में, विशेषकर पश्चिमी देशों में, एक नया चलन सामने आया है जहां लोग जन्म से मिले अपने धर्म को त्याग कर नास्तिकता या किसी अन्य आध्यात्मिक मार्ग को अपना रहे हैं। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि समाज में गहराती एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति का संकेत है। प्रसिद्ध शोध संस्थान प्यू रिसर्च सेंटर के अध्ययनों ने इस बदलाव को प्रमुखता से उजागर किया है। आइये जानते हैं इस बारे में विस्तार से :
 
 
प्यू रिसर्च के चौंकाने वाले खुलासे
प्यू रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार, इटली, जर्मनी, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम जैसे यूरोपीय देशों में जन्म से प्राप्त धर्म को छोड़ने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है। ये वे देश हैं जहाँ पारंपरिक रूप से ईसाई धर्म का वर्चस्व रहा है।
 

क्यों हो रहा है यह बदलाव?
यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर क्यों लोग अपने पारंपरिक धार्मिक विश्वासों से दूर हो रहे हैं? इसके पीछे कई जटिल कारण हो सकते हैं:
  1. आधुनिकता और विज्ञान का प्रभाव: आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तर्कसंगत सोच के बढ़ते प्रभाव ने कई लोगों को पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया है। वैज्ञानिक प्रगति ने कुछ धार्मिक सिद्धांतों को चुनौती दी है, जिससे लोग धर्म से दूर हुए हैं।
  2. धर्मनिरपेक्षता का बढ़ता चलन: यूरोपीय समाज में धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज्म) एक मजबूत मूल्य के रूप में उभरी है। राज्य और धर्म के बीच अलगाव की यह अवधारणा लोगों को व्यक्तिगत रूप से भी धर्म को अपने जीवन का केंद्रीय हिस्सा न मानने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  3. संस्थागत धर्म से मोहभंग: कुछ लोग संगठित धर्मों की संस्थागत कार्यप्रणाली, उनके ऐतिहासिक कृत्यों या वर्तमान में सामने आ रही समस्याओं (जैसे घोटालों या कट्टरता) से निराश होकर उनसे दूरी बना लेते हैं। वे धर्म की संस्थागत संरचना के बजाय व्यक्तिगत आध्यात्मिकता की ओर मुड़ते हैं या पूरी तरह से नास्तिक हो जाते हैं।
  4. व्यक्तिगत स्वतंत्रता की चाह: आज की युवा पीढ़ी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय को अधिक महत्व देती है। वे किसी भी बाध्यकारी संरचना या नियम से बंधे रहना पसंद नहीं करते, जिसमें कभी-कभी धर्म भी शामिल होता है।
  5. सामाजिक परिवर्तन और विविधता: समाज में बढ़ती विविधता, विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के संपर्क में आने से भी लोगों के धार्मिक दृष्टिकोण में बदलाव आता है।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- हमारे हाथ बंधे नहीं हैं

CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को बड़ी राहत, SEM कोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश

Gold-Silver Price Today: सस्ता हुआ सोना, चांदी के दामों में गिरावट, जानिए देश के बड़े शहरों में क्या रहे भाव

Electric Scooter : TVS और Ather को टक्कर देने आ रहा है VinFast का सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर, पेटेंट में दिखा 14-इंच व्हील वाला डिजाइन

जेफ्री एपस्टीन के साथ हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरें वायरल: विपक्ष ने घेरा, गरमाई सियासत

सभी देखें

नवीनतम

मार्को रुबियो पहुंचे जामनगर रिफाइनरी, न्यू एनर्जी गीगा-फैक्ट्री और डेटा सेंटर में अमेरिकी कंपनियों से सहयोग पर चर्चा

तुर्किये-पाकिस्तान समेत 4 देशों ने किया 'बद्र' रक्षा समझौता, भारत के लिए क्या मायने?

8-10 मिनट में मौके पर पहुंची यूपी पुलिस, बचीं कई जिंदगियां; योगी सरकार में पुलिस बजट 2.7 गुना बढ़ा

Jio IPO Day 1: पहले ही दिन 3.16 गुना सब्सक्राइब, ₹69,745 करोड़ की बोली; QIB कैटेगरी में 9.42 गुना मांग

CM योगी बोले- पहले अपराधियों को छूते ही सत्ता से आने लगते थे फोन, अब यूपी में अपराधियों को पता है उनका आखिरी ठिकाना

अगला लेख