khatu shyam baba

27 सितंबर : राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि, जानें खास बातें

Webdunia
Raja Ram Mohan Roy: आज समाजसेवी राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि है। उनका निधन 27 सितंबर को हुआ था। उन्हें भारत के विचारों में सुधार लाने तथा सामाजिक सुधार युग के पितामह कहा जाता है। जानें उनके बारे में खास बातें... 
 
• राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई, 1772 को पश्चिम बंगाल में हुगली जिले के राधानगर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम रामकांत राय था। 
 
• राजा राममोहन राय की प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई तथा उन्हें उच्च शिक्षा के लिए पटना भेजा गया। तीक्ष्ण बुद्धि के धनी राम मोहन राय ने 15 वर्ष की उम्र तक बांग्ला, पारसी, अरबी और संस्कृत सीख ली थी। 
 
• राजा राममोहन राय मूर्तिपूजा और रूढ़िवादी हिंदू परंपराओं के विरूद्ध थे। वह सभी प्रकार की सामाजिक धर्मांधता और अंधविश्वास के खिलाफ थे। लेकिन उनके पिता रूढ़िवादी हिंदू ब्राह्मण थे। अत: पिता-पुत्र में मतभेद पैदा होने के कारण वे घर छोड़कर चले गए। और घर लौटने से पहले उन्होंने काफी यात्राएं की। 
 
• राजा राममोहन राय की घर वापसी के बाद उनके परिवार ने उनकी शादी कर दी, इस आशा के साथ कि वे बदल जाएंगे। लेकिन इसका भी उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। फिर वे वाराणसी चले गए और वहां उन्होंने वेदों, उपनिषदों एवं हिंदू दर्शन का गहन अध्ययन किया। 
 
• जब उनके पिता 1803 में गुजर गए और वह मुर्शिदाबाद लौट आए। राजा राममोहन ने राय ईस्ट इंडिया कंपनी के राजस्व विभाग में नौकरी शुरू कर दी। वह जॉन डिग्बी के सहायक के रूप में काम करते थे। 
 
• वहां वह पश्चिमी संस्कृति एवं साहित्य के संपर्क में आए। उन्होंने जैन विद्वानों से जैन धर्म का अध्ययन किया और मुस्लिम विद्वानों की मदद से सूफीवाद की शिक्षा भी ली। 
 
• समाज की कुरीतियां जैसे सती प्रथा, बाल विवाह के खिलाफ राजा राममोहन राय ने खुल कर संघर्ष किया। तथा गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बेंटिक की मदद से सती प्रथा के खिलाफ कानून बनवाया। 
 
• राजा राममोहन राय ने कहा था कि वेदों में सती प्रथा का कोई स्थान नहीं है। अत: उन्होंने घूम-घूम कर लोगों को उसके खिलाफ जागरूक किया तथा लोगों की सोच में बदलाव लाने का अथक प्रयास किया। 
 
• उन्होंने 1814 में आत्मीय सभा का गठन कर समाज में सामाजिक और धार्मिक सुधार शुरू करने का प्रयास किया। फिर उन्होंने महिलाओं के फिर से शादी करने, संपत्ति में हक समेत महिला अधिकारों के लिए अभियान चलाया। उन्होंने सती प्रथा और बहुविवाह का जोरदार विरोध किया। 
 
• उन दिनों समाज की कुरीतियों में काफी पिछड़ापन था और संस्कृति के नाम पर लोग अपनी जड़ों की ओर देखते थे, जबकि राजा राममोहन राय यूरोप के प्रगतिशील एवं आधुनिक विचारों से प्रभावित थे। उन्होंने इस नब्ज को समझा और जड़ को ध्यान में रखकर वेदांत को नया अर्थ देने की चेष्टा की। राजा राममोहन राय ने शिक्षा खासकर स्त्री-शिक्षा का समर्थन किया। उन्होंने अंग्रेजी, विज्ञान, पश्चिमी चिकित्सा एवं प्रौद्योगिकी के अध्ययन पर बल दिया। वह मानते थे कि अंग्रेजी शिक्षा पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से बेहतर है। 
 
• सन् 1822 में अंग्रेजी शिक्षा पर आधारित स्कूल की स्थापना की और आधुनिक भारत के निर्माता कहे जाने वाले महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय ने केवल सती प्रथा जैसी कुरीति खत्म नहीं की बल्कि लोगों के सोचने-समझने का ढंग बदल दिया। उन्होंने ने ‘ब्रह्ममैनिकल मैग्ज़ीन, मिरात-उल-अखबार, बंगदूत जैसे पत्रों का प्रकाशन भी किया।
 
• राजा राममोहन राय ने नवंबर, 1830 में ब्रिटेन की यात्रा की। समाज सुधारक राजा राममोहन राय का निधन ब्रिस्टल के समीप स्टाप्लेटन में 27 सितंबर 1833 को हुआ था।

ALSO READ: Mahatma Gandhi essay | महात्मा गांधी पर हिंदी में निबंध

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या एक पुत्र भी गुरु हो सकता है? माता देवहूति का अद्भुत जीवन

रंगों और स्वाद का संगम: रंगपंचमी पर्व के 5 सबसे बेहतरीन पकवान

Low Blood Sugar: हाइपोग्लाइसीमिया, बॉडी में शुगर कम होने पर क्या लक्षण महसूस होते हैं?

सृष्टि का आधार और शक्ति का विस्तार है स्त्री

क्या सीढ़ियां चढ़ते ही घुटने चटकने लगते हैं? बिना दवा जोड़ों के दर्द से राहत दिलाएंगे ये 7 देसी नुस्खे

सभी देखें

नवीनतम

Tips for Rang Panchami: रंगपंचमी पर इन 5 तरीकों से रखें खुद को सुरक्षित

Womens Day Inspirational Quotes: महिला दिवस पढ़ें 10 प्रेरणादायक कोट्‍स

International Womens Day 2026: महिला दिवस कब और कैसे शुरू हुआ, जानें इतिहास और महत्व

Womens Day Massages: महिला दिवस पर सबसे जबरदस्त और प्रेरणादायक 15 शुभकामना संदेश

Shivaji Jayanti: तिथिनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती आज, जानें इस महान योद्धा के बारे में 5 खास बातें

अगला लेख