Publish Date: Wed, 27 May 2026 (13:33 IST)Updated Date: Wed, 27 May 2026 (13:33 IST)
Pandit Nehru Achievements: पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। उन्होंने एक ऐसे समय में देश की कमान संभाली थी जब भारत सदियों की गुलामी, विभाजन की त्रासदी, भयंकर गरीबी और सांप्रदायिक दंगों से जूझ रहा था। उस दौर में देश को बिखरने से बचाना और एक आधुनिक राष्ट्र की नींव रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था। इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नेहरू के कई फैसले और कार्य ऐसे थे जिन्हें उनके कद, दूरदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय छवि के बिना कोई दूसरा प्रधानमंत्री शायद ही अमली जामा पहना पाता।
1. विविध रियासतों का सफल विलय और 'लोकतांत्रिक' भारत का निर्माण
2. 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की शुरुआत
3. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे 'आधुनिक भारत के मंदिरों' की स्थापना
4. 'इसरो' (ISRO) और परमाणु कार्यक्रम (DRDO/BARC) की शुरुआत
5. 'हिंदू कोड बिल' के जरिए महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाना
उनके 5 ऐसे ही बड़े कार्य निम्नलिखित हैं:
1. विविध रियासतों का सफल विलय और 'लोकतांत्रिक' भारत का निर्माण
विभाजन के समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती 500 से अधिक स्वायत्त रियासतों (Princely States) को एक सूत्र में बांधना था। हालांकि जमीनी स्तर पर रियासतों के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है, लेकिन इसके पीछे नेहरू की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सोच की बड़ी भूमिका थी।
एकता और लोकतंत्र का समन्वय: कई नव-स्वतंत्र देशों में राजशाही खत्म होने के बाद सैन्य शासन या तानाशाही आ गई। लेकिन नेहरू ने सुनिश्चित किया कि सभी रियासतें न केवल भारत का हिस्सा बनें, बल्कि वहां के नागरिकों को भी समान लोकतांत्रिक अधिकार मिलें। उन्होंने भारत को एक 'हिंदू पाकिस्तान' बनने से रोका और बहुसंस्कृतिवाद को बढ़ावा दिया।
2. 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की शुरुआत
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया दो महाशक्तियों- अमेरिका (पूंजीवादी ब्लॉक) और सोवियत संघ (साम्यवादी ब्लॉक) के बीच 'शीत युद्ध' (Cold War) में बंट चुकी थी। उस समय नए आजाद हुए देशों पर किसी एक पाले में जाने का भारी दबाव था।
स्वतंत्र विदेश नीति: नेहरू ने किसी भी महाशक्ति का पिछलग्गू बनने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने मिस्र के नासिर और युगोस्लाविया के टीटो के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement - NAM) की नींव रखी।
ग्लोबल लीडरशिप: इसके जरिए उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर एक नैतिक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। इस नीति के कारण भारत को अमेरिका और सोवियत संघ दोनों से मदद मिली, जो उस समय किसी अन्य नेता के अंतरराष्ट्रीय रसूख के बिना असंभव था।
3. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे 'आधुनिक भारत के मंदिरों' की स्थापना
नेहरू का मानना था कि जब तक भारत वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक उसकी आजादी अधूरी है। उन्होंने भारी उद्योगों, बांधों और शैक्षणिक संस्थानों को 'आधुनिक भारत के मंदिर' कहा था।
संस्थानों की दूरदर्शी नींव: नेहरू ने देश में IITs (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान), IIMs (भारतीय प्रबंधन संस्थान), AIIMS, और IISER जैसे शीर्ष संस्थानों की स्थापना की।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper): उन्होंने देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और अनुसंधान में लगाया। आज भारत जो दुनिया का आईटी हब बना है और वैश्विक स्तर पर हमारे डॉक्टर्स-इंजीनियर्स का जो डंका बजता है, उसकी बुनियाद नेहरू ने ही रखी थी।
4. 'इसरो' (ISRO) और परमाणु कार्यक्रम (DRDO/BARC) की शुरुआत
आज भारत अंतरिक्ष और परमाणु तकनीक के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शुमार है, लेकिन इसकी शुरुआत तब हुई थी जब भारत के पास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं।
अंतरिक्ष और परमाणु विजन: नेहरू ने महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा आयोग (जो बाद में BARC बना) और विक्रम साराभाई के साथ मिलकर INCOSPAR (जो बाद में ISRO बना) की स्थापना की।
असंभव को संभव बनाना: उस दौर में जब देश में भुखमरी की स्थिति थी, तब अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रम पर पैसा खर्च करने के फैसले की भारी आलोचना हो सकती थी। लेकिन नेहरू के अडिग विश्वास के कारण ये संस्थान राजनीति से दूर रहकर देश को आत्मनिर्भर बनाने में सफल रहे।
5. 'हिंदू कोड बिल' के जरिए महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाना
आजादी के समय भारतीय समाज अत्यधिक रूढ़िवादी था और महिलाओं के पास पैतृक संपत्ति, तलाक या गोद लेने जैसे बुनियादी कानूनी अधिकार नहीं थे। नेहरू भारत को सामाजिक रूप से भी आधुनिक बनाना चाहते थे।
भारी विरोध के बावजूद सुधार: नेहरू ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ मिलकर 'हिंदू कोड बिल' (Hindu Code Bill) को संसद में पेश किया। इस बिल का खुद कांग्रेस के अंदर के वरिष्ठ नेताओं और सनातन रूढ़िवादी संगठनों ने उग्र विरोध किया था।
महिला सशक्तिकरण की नींव: नेहरू ने अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी और इस बिल को अलग-अलग हिस्सों में (हिंदू विवाह अधिनियम, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम आदि) पारित कराया। इसके जरिए हिंदू महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, एक विवाह का नियम और तलाक का अधिकार मिला। उस दौर में ऐसा क्रांतिकारी सामाजिक सुधार करना किसी भी अन्य प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं थी।
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