फिल्ममेकर आलोक बाजपेयी की ट्रैफिक अवेयरनेस शॉर्ट फिल्मों की पुलिस अधिकारियों ने की सराहना
इंदौर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, एनसीसी कैडेट्स और गणमान्य नागरिकों के समक्ष प्रदर्शित हुईं दो विशेष शॉर्ट फिल्में, कम समय में प्रभावी संदेश देने की अनूठी शैली बनी चर्चा का केंद्र
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 (16:22 IST)
Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 (17:25 IST)
traffic awareness short films: सिनेमा की असली ताकत सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि उनकी सोच को प्रभावित करना और समाज को बेहतर दिशा देना भी है। इसी उद्देश्य को अपनी रचनात्मकता का आधार बनाकर सामाजिक सरोकारों पर प्रभावी शॉर्ट फिल्में बनाने वाले फिल्ममेकर आलोक बाजपेयी की फ़िल्म निर्माण शैली को इंदौर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने खूब सराहा।
यातायात जागरूकता पर केंद्रित बाजपेयी की दो शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के विद्यार्थियों, कलाकारों और अन्य गणमान्य नागरिकों के समक्ष किया गया। फिल्मों की प्रस्तुति, संदेश देने के नए अंदाज़ और मनोरंजन के साथ जागरूकता पैदा करने की शैली ने उपस्थित दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (हेडक्वार्टर एवं क्राइम) राजेश कुमार सिंह, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम एवं ट्रैफिक) राजेश कुमार त्रिपाठी तथा यातायात थाना प्रभारी अरविंद सिंह डांगी ने फिल्मों की सराहना की।
अधिकारियों ने बाजपेयी की फिल्मों को प्रभावी, अभिनव और कम समय में सटीक एवं गहरा संदेश देने वाली प्रस्तुतियां बताया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि ये फिल्में अपनी बात मनोरंजक और अलग अंदाज में रखती हैं, जिससे उनका संदेश दर्शकों के मन में ठहरने की क्षमता रखता है। अधिकारियों ने आलोक बाजपेयी को इसी तरह की सामाजिक संदेशपरक फिल्मों का निर्माण जारी रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
जब कहानी छोटी हो, लेकिन उसका असर बड़ा हो!
आज के तेज़ रफ्तार डिजिटल दौर में, जहां दर्शकों का ध्यान कुछ ही पलों में दूसरी ओर चला जाता है, वहां शॉर्ट फिल्में सामाजिक जागरूकता का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। आलोक बाजपेयी की फिल्में इसी संभावना को सामने रखती हैं—जहां सीमित समय में मनोरंजन, संवेदना और सामाजिक संदेश को एक साथ पिरोने का प्रयास किया गया है।
यातायात जागरूकता जैसे विषय पर रचनात्मक सिनेमा का यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि सड़क सुरक्षा का संदेश केवल नियमों की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार का हिस्सा बने।
फ़िल्ममेकर के रूप में आलोक बाजपेयी की रचनात्मक सोच का मूल उद्देश्य स्पष्ट है—संदेश ऐसा हो जो केवल सुनाई न दे, बल्कि याद भी रहे। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बाजपेयी से इसी तरह की समाजोपयोगी शॉर्ट फ़िल्मों का निर्माण जारी रखने का आग्रह किया।