Publish Date: Tue, 21 Apr 2026 (17:59 IST)
Updated Date: Tue, 21 Apr 2026 (18:08 IST)
पहलगाम आतंकी हमले में इंदौर के परिवार से उनके मुखिया सुशील नथानिएल को छीन लिया था। इस बात को एक साल हो गया। नियम था कि परिवार को एक सरकारी नौकरी एक मुआवजा मिलेगा। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हो सका। बेटा आज भी सरकारी मदद की इंतजार कर रहा है।
टूट चुकी है पत्नी जेनिफर : बता दें कि एक साल पहले पहलगाम में आतंकी हमलों में 58 साल के सुशील नथानिएल, जो अपनी पत्नी और बेटे के साथ खुशियां मनाने कश्मीर गए थे, शहीद हो गए थे। आज एक साल बाद, उनकी पत्नी जेनिफर (55) अपने घर के एक कोने में आज भी उसी खौफनाक मंजर को जी रही हैं। हादसे में पत्नी जेनिफर को मानसिक रूप से इतना तोड़ दिया है कि अब वे एक बच्चे की तरह व्यवहार करने लगी हैं और छोटी-छोटी चीजें भूल जाती हैं।
टूट गए बेटे के सपने : सुशील का बेटा ऑस्टेन (28) का सपना था कि यूनाइटेड किंगडम जाएगा और वहां स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में MBA करेगा। लेकिन पिता की दर्दनाक मौत के बाद उसके घर की कहानी बदल गई है और उसके सपने टूट गए हैं। अब वो पूरे घर की जिम्मेदारी संभाल रहा है। ऑस्टेन का कहना है, 'मेरा सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम चला गया। अब मुझे सब संभालना पड़ता है क्योंकि मां इस स्थिति में नहीं हैं।' विडंबना देखिए कि पिता की मौत के बाद ऑस्टेन को अनुकंपा नियुक्ति देने से मना कर दिया गया क्योंकि उसकी मां सरकारी नौकरी में हैं।
सरकारी व्यवस्था ने अकेला छोड़ दिया : बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने अपने राज्य के पीड़ितों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा दिया, वहीं मध्य प्रदेश की तत्कालीन सरकार की ओर से केवल वादे ही मिले। ऑस्टेन कहते हैं, 'राजनीतिक वादे हुए, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। हमने कभी मांगना नहीं सीखा क्योंकि पिता ने हमें स्वाभिमानी बनाया था।' मुश्किल वक्त में अलग-अलग धर्मों के पड़ोसियों ने इस परिवार का साथ दिया, लेकिन सरकारी व्यवस्था ने उन्हें अकेला छोड़ दिया।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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