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महर्षि वेदव्यास के पिता महान ज्योतिषज्ञ ऋषि पराशर के बारे में 5 रोचक बातें

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parashar rishi
ऋषि पराशरजी एक दिव्‍य और अलौकिक शक्ति से संपन्न ऋषि थे। उन्‍होंने धर्मशास्‍त्र, ज्‍योतिष, वास्‍तुकला, आयुर्वेद, नीतिशास्‍त्र, विषयक ज्ञान को प्रकट किया। उनके द्वारा रचित ग्रं‍थ वृहत्‍पराशर होराशास्‍त्र, लघुपराशरी, वृहत्‍पराशरीय धर्म संहिता, पराशर धर्म संहिता, पराशरोदितम, वास्‍तुशास्‍त्रम, पराशर संहिता (आयुर्वेद), पराशर महापुराण, ऋग्वेद कई ऋचाएं, विष्णु पुराण, पराशर स्मृति, विदेहराज जनक को उपदिष्ट गीता (पराशर गीता) आदि पराशर की रचनाएं हैं। पराशर नीतिशास्‍त्र, आदि मानव मात्र के लिए कल्‍याणार्थ रचित ग्रं‍थ जगप्रसिद्ध हैं जिनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। जानिए ऋषि पराशर के बारे में जानिए 5 खास बातें।
 
1. शिव अवतार: पराशर मुनि को भगवान शिव का छब्बीसवां अवतार माना जाता है। ऋषि पराशर ने कई विद्याओं का ज्ञान प्राप्त कर उसे दुनिया को प्रदान किया था। 
 
2. निषाद कन्या सत्यवती: ऋषि पराशर ने निषादाज की कन्या सत्यवती के साथ उसकी कुंआरी अवस्था में समागम किया था जिसके चलते 'महाभारत' के लेखक वेदव्यास का जन्म हुआ। सत्यवती ने बाद में राजा शांतनु से विवाह किया था।
 
4. राक्षस-सत्र यज्ञ : पराशर ऋषि के पिता को राक्षस कल्माषपाद ने खा लिया था। जब यह बात पराशर ऋषि को पता चली तो उन्होंने राक्षसों के समूल नाश हेतु राक्षस-सत्र यज्ञ प्रारंभ किया जिसमें एक के बाद एक राक्षस खिंचे चले आकर उसमें भस्म होते गए।
 
कई राक्षस स्वाहा होते जा रहे थे, ऐसे में महर्षि पुलस्त्य ने पराशर ऋषि के पास पहुंचकर उनसे यह यज्ञ रोकने की प्रार्थना की और उन्होंने अहिंसा का उपदेश भी दिया। पराशर ऋषि के पुत्र वेदव्यास ने भी पराशर से इस यज्ञ को रोकने की प्रार्थना की। उन्होंने समझाया कि बिना किसी दोष के समस्त राक्षसों का संहार करना अनुचित है। पुलस्त्य तथा व्यास की प्रार्थना और उपदेश के बाद उन्होंने यह राक्षस-सत्र यज्ञ की पूर्णाहुति देकर इसे रोक दिया।
 
5. पराशर का ज्योतिष शास्त्र : पराशर ऋषि ने अनेक ग्रंथों की रचना की जिसमें से ज्योतिष के ऊपर लिखे गए उनके ग्रंथ बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। प्राचीन और वर्तमान का ज्योतिष शास्त्र पराशर द्वारा बताए गए नियमों पर ही आधारित है। ऋषि पराशर ने ही बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, लघुपराशरी (ज्योतिष) लिखा है।
 

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