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स्वतंत्रता दिवस विशेष: आजादी की नींव रखने वाले 10 प्रमुख और ऐतिहासिक नारे

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Independence day
15 August nare in Hindi: भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल हथियारों और आंदोलनों से नहीं, बल्कि शब्दों की ताकत से भी लड़ा गया था। उन शब्दों में वह ऊर्जा थी, जो लाखों लोगों के दिलों में क्रांति की चिंगारी जगा देती थी। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा इन नारों ने दी, और हर वर्ग के लोगों को एकजुट किया। आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, तो तिरंगे की शान के साथ इन नारों की गूंज भी हमें आज़ादी की याद दिलाती है। यह सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि वह जोश, वह संकल्प और वह उम्मीद थे, जिसने हमें आजाद भारत का सपना पूरा करने की राह दिखाई।
 
इस विशेष अवसर पर, आइए जानते हैं आजादी की नींव रखने वाले 10 प्रमुख नारे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को दिशा दी और जो आज भी हमें प्रेरणा देते हैं।
 
प्रसिद्ध और जोशीले देशभक्ति नारे/स्लोगन 
 
1. "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा"
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का यह नारा भारत की आजादी के लिए सबसे मजबूत विचारधाराओं में से एक था। इसने यह संदेश दिया कि आजादी किसी का दिया हुआ उपहार नहीं, बल्कि हमारा जन्म से प्राप्त अधिकार है, जिसे हमें हर हाल में पाना है।
 
2. "इंकलाब जिंदाबाद"
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों का यह नारा आज भी देशभक्ति की धड़कन तेज कर देता है। "इंकलाब जिंदाबाद" सिर्फ क्रांति का आह्वान नहीं था, बल्कि यह विश्वास था कि बदलाव संभव है और इसके लिए बलिदान भी स्वीकार्य है।
 
3. "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा"
1944 में, सुभाष चंद्र बोस ने एक जोशीला भाषण दिया, जिसमें ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ तत्काल सशस्त्र संघर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उनकी प्रसिद्ध पुकार, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा", उन लोगों के दिलों में गहराई तक उतर गई, जो स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए साहसी और उग्र कदम उठाने के पक्षधर थे।
 
4. "करो या मरो"
महात्मा गांधी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में यह नारा दिया। इसका संदेश था कि अब केवल दो ही रास्ते हैं या तो आजादी हासिल करो या इस संघर्ष में अपने प्राण न्यौछावर कर दो। यह नारा स्वतंत्रता आंदोलन के निर्णायक मोड़ पर जनमानस को प्रेरित करने में सफल रहा।
 
5. "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है"
रामप्रसाद बिस्मिल की इस पंक्ति ने क्रांतिकारियों को अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार कर दिया। "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है" सिर्फ कविता नहीं, बल्कि एक ज्वलंत संकल्प था।
 
6. "अंग्रेज़ो भारत छोड़ो"
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का यह नारा अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ खुली चुनौती था। यह नारा इतना शक्तिशाली था कि हर गली, हर गांव और हर शहर में गूंजने लगा।
 
7. "वंदे मातरम्"
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के गीत से निकला यह नारा स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बन गया। "वंदे मातरम्" हर रैली, आंदोलन और सभा में गूंजता था, और लोगों के दिलों में मातृभूमि के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना भर देता था।
 
8. "जय हिंद"
सुभाष चंद्र बोस का यह नारा हर भारतीय के दिल में आज भी जोश भर देता है। यह छोटा-सा वाक्य आज़ादी, गर्व और एकता का प्रतीक है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के समय में भी यह नारा देशभक्ति के हर मौके पर गूंजता है।
 
9. "साइमन गो बैक"
1928 में साइमन कमीशन के आगमन पर पूरे देश में यह नारा गूंज उठा। इसका संदेश साफ था – भारत अब विदेशी नियंत्रण को स्वीकार नहीं करेगा। इस नारे ने नौजवानों और बुजुर्गों दोनों के बीच एकजुटता पैदा की और ब्रिटिश हुकूमत को यह संकेत दिया कि भारत अब अपनी राह खुद तय करेगा।
 
10. "किसी राष्ट्र की सच्ची महानता उसके प्रेम और बलिदान के अमर आदर्शों में छिपी होती है, जो पूरे देश की माताओं को प्रेरित करती है"
1915 में, भारत कोकिला कही जाने वाली सरोजिनी नायडू ने ऐसे ओजस्वी भाषण दिए, जो भारतीय जनमानस के हृदय में गहराई तक बस गए। उनका ये भावपूर्ण कथन, करुणा और निस्वार्थता के उन मूल्यों को उजागर करता है, जो राष्ट्र की शक्ति और एकता को मजबूत बनाते हैं।
 

अस्वीकरण (Disclaimer) : सेहत, ब्यूटी केयर, आयुर्वेद, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार जनरुचि को ध्यान में रखते हुए सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 

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