* वंदना मैं करूं वंदना भारत मां। कल-कल झरने, शीतल जल के, वन-उपवन, फल से लदे हुए, है मलय गंध-युत, शीत पवन, श्यामल-श्यामल, धरती पावन शुचि मंगल प्राणदायिनी तू। मैं करूं वंदना भारत मां। दूधिया चांदनी, की वर्षा, है मुग्ध यामिनी, पुलक भरी, है सुन्दर...