Publish Date: Fri, 08 Aug 2025 (11:59 IST)
Updated Date: Fri, 08 Aug 2025 (16:17 IST)
World Sanskrit Day: इस साल 9 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ-साथ संस्कृत दिवस या विश्व संस्कृत दिवस भी मनाया जाएगा। हालांकि, यह जानना जरूरी है कि संस्कृत दिवस की तारीख हर साल बदलती रहती है, क्योंकि इसे श्रावण मास की पूर्णिमा (श्रावण पूर्णिमा) को मनाया जाता है। इस बार श्रावण पूर्णिमा 9 अगस्त को है, इसलिए यह दोनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे।
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आइए जानते हैं संस्कृत दिवस का इतिहास, महत्व और इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें:
संस्कृत दिवस का इतिहास: संस्कृत दिवस मनाने की शुरुआत 1969 में भारत सरकार ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना, उसके महत्व को स्थापित करना और उसे पुनर्जीवित करना था। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि संस्कृत को सभी भारतीय भाषाओं की जननी माना जाता है। इस दिवस के माध्यम से सरकार ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए कई योजनाएं भी शुरू कीं।
संस्कृत का महत्व:
1. भाषाओं की जननी: संस्कृत को हिंदी, मराठी, बंगाली, गुजराती और कई अन्य भारतीय भाषाओं की जननी माना जाता है। इसका व्याकरण और शब्द-भंडार बहुत समृद्ध है, जिसका प्रभाव इन सभी भाषाओं पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
2. ज्ञान और विज्ञान का भंडार: हमारे सभी प्राचीन ग्रंथ, जैसे वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण और महाभारत, संस्कृत में ही लिखे गए हैं। आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित और खगोल विज्ञान जैसे विषयों का प्राचीन ज्ञान भी संस्कृत में ही मौजूद है।
3. वैज्ञानिक भाषा: संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना और व्याकरण इसे दुनिया की सबसे सटीक भाषाओं में से एक बनाती है। इसके नियमों के कारण इसमें शब्दों के उच्चारण और अर्थ में कोई भ्रम नहीं रहता। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए भी इसे एक आदर्श भाषा माना जाता है।
संस्कृत से जुड़ी रोचक जानकारी:
• दुनिया की सबसे पुरानी भाषा: संस्कृत को दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक माना जाता है। इसके लिखित प्रमाण 3,500 साल से भी अधिक पुराने हैं।
• आज भी बोली जाती है: कर्नाटक में स्थित मत्तूर गांव एक ऐसा गांव है जहां आज भी हर कोई संस्कृत में ही बात करता है। यह गांव संस्कृत के पुनरुद्धार का एक अद्भुत उदाहरण है।
• UNESCO की मान्यता: UNESCO ने संस्कृत को विश्व की सबसे शुद्ध, समृद्ध और वैज्ञानिक भाषा के रूप में मान्यता दी है।
• संवाद और उच्चारण: संस्कृत में उच्चारण और लेखन का गहरा संबंध है। जैसा लिखा जाता है, वैसा ही उच्चारण किया जाता है, जिससे इसमें उच्चारण की कोई गलती नहीं होती।
• संस्कृत एक प्राचीन भारतीय-आर्य भाषा तथा इसे कई भारतीय भाषाओं की जननी भी माना जाता है, दूसरे शब्दों में इसे देव वाणी/ देवताओं की भाषा भी कहा जाता है।
संस्कृत दिवस हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और इस महान भाषा के गौरव को फिर से स्थापित करने का मौका देता है।
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