Publish Date: Sat, 21 Feb 2026 (13:18 IST)
Updated Date: Sat, 21 Feb 2026 (14:38 IST)
When is Holi 2026: इस बार होलिका दहन की तारीखों को लेकर ज्योतिषाचार्यों में मतभेद स्पष्ट नजर आ रहा है। होलिका दहन पूर्णिमा की रात को होता है। 2 मार्च को पूर्णिमा की रात रहेगी लेकिन इसी दौरान भद्रा काल भी रहेगा। इसके बाद 3 मार्च को भद्रा सुबह तक रहेगा और पूर्णिमा तिथि शाम को समाप्त हो जाएगी। लेकिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर से प्रारंभ होकर शाम को समाप्त होगा। इसका अर्थ है कि 2 मार्च को भद्रा काल और 3 मार्च को चंद्र ग्रहण रहेगा। यही वजह है जो ज्योतिषियों को असमंजस में डाल रही है कि होलिका दहन 2 मार्च को करें या कि 3 मार्च को, चलिए जानते हैं सही तारीख।
कब से कब तक रहेगी पूर्णिमा तिथि?
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 02 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 55 मिनट से।
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 03 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 07 मिनट तक।
कब से कब तक रहेगा भद्रा काल?
भद्रा का प्रारंभ 2 मार्च की शाम को 05 बजकर 55 मिनट पर होगा।
भद्रा काल का समापन 3 मार्च को सुबह 05 बजकर 28 मिनट पर होगा।
इस बीच पुच्छ काल 2 मार्च को रात 01:25 से 02:35 तक रहेगा और भद्रा का मुख 02:35 से तड़के 04:30 तक रहेगा।
चंद्र ग्रहण कब से कब तक रहेगा?
चंद्र ग्रहण 03 मार्च 2026 को दिल्ली टाइम अनुसार दोपहर 03 बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ होकर शाम को 06 बजर 46 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इस समय सूतक काल भी समाप्त हो जाएगा।
इसका अर्थ है कि 02 मार्च की पूर्णिमा तिथि पर भद्रा का साया है और अगले दिन यानी 03 मार्च को शाम तक पूर्णिमा तिथि रहेगी लेकिन उस दिन शाम तक चंद्र ग्रहण रहेगा। अब जानते हैं कि ज्योतिष क्या कहते हैं-
2 मार्च का समर्थन करने वाले ज्योतिषियों का तर्क:
2 मार्च का समर्थन करने वाले ज्योतिषियों का मानना है कि पूर्णिमा तिथि में ही होलिका दहन होता है लेकिन इस दिन अर्थात 02 मार्च को भद्रा काल शाम 05 बजकर 55 पर से प्रारंभ हो जाएगा जो अगले दिन अर्थात 03 मार्च को प्रात: 05 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
1. ज्योतिषियों का एक वर्ग मानते हैं पूर्णिमा तिथि, पूर्वार्द्ध की भद्रा की पांच घटियां व्यतीत होना और अगले दिन ग्रहण का सूतक लगने से पूर्व का समय होने के कारण दिनांक 02 मार्च 2026 को रात्रि 11 बजे से 12 बजकर 30 के मध्य होलिका-दहन किया जाना सर्वाधिक शुद्ध एवं शास्त्रसम्मत रहेगा।
2. कुछ विद्वानों के अनुसार, यदि भद्रा मध्यरात्रि तक हो, तो 'भद्रा मुख' त्याग कर 'भद्रा पुच्छ' के समय दहन किया जा सकता है। यह भद्रा का पुच्छ काल 01:25 एएम से 02:35 एएम तक रहेगा। इसके बाद अगले दिन अर्थात 03 मार्च को रंगवाली होली मना सकते हैं।
3 मार्च का समर्थन करने वाले ज्योतिषियों का तर्क:
1. शास्त्रों के अनुसार, भद्रा के मुख में दहन करने से न केवल दहन करने वाले का, बल्कि समाज और राष्ट्र का भी अनिष्ट हो सकता है। यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि भद्रा के समाप्त होने का इंतजार नहीं किया जा सकता जैसे पूर्णिमा तिथि का समाप्त होना, तो भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन किया जा सकता है, लेकिन शर्त यह है कि भद्रा धरतीलोक की नहीं होना चाहिए। यदि यह भद्रा आकाश या पाताल लोक की होती तो फिर 02 मार्च को होलिका दहन रात्रि को पुच्छ काल में किया जा सकता था परंतु इस बार भद्रा का वास धरतीलोक पर है। इसलिए 2 मार्च को होलिका दहन नहीं करना ही उचित है।
2. 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का काल और सूतक काल शाम 06:46 तक ही रहेगा। इसलिए सूतककाल के बाद दहन किया जाना शुभ है, क्योंकि इस काल में न तो भद्रा का और न ही चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त हो जाएगी लेकिन तब भी प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि रहेगी। ऐसे में होलिका दहन और पूजन करने में कोई हर्ज नहीं है।
3. निर्णय सिंधु और धर्मसिंधु के अनुसार, यदि पहले दिन भद्रा का साया हो और दूसरे दिन पूर्णिमा प्रदोष काल से थोड़ा पहले समाप्त हो रही हो, तो भी दूसरे दिन भद्रा मुक्त समय को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
4. जनमानस की सुविधा और शुद्धि के लिए, अधिकांश विद्वान 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के बाद होलिका दहन और 4 मार्च को होली खेलने की सलाह दे रहे हैं। यदि आप पूरी तरह 'भद्रा और ग्रहण मुक्त' पूजा करना चाहते हैं, तो 3 मार्च 2026 की शाम ही सबसे उपयुक्त समय है। हमारा भी यही मत है कि आप 03 मार्च की शाम को चंद्र ग्रहण की समाप्ति के बाद होलिका दहन और पूजन करके अगले दिन 04 मार्च को रंगोवाली होली मनाएं।
निष्कर्ष:
2 मार्च: पूर्णिमा की रात है और भद्रा पुच्छ का विकल्प है, लेकिन भद्रा का धरती पर वास होने के कारण जोखिम है और अगले दिन ग्रहण है।
03. मार्च: ग्रहण के बाद का समय पूर्णतः भद्रा-मुक्त और सूतक-मुक्त है। यह अधिक सुरक्षित और शास्त्रसम्मत विकल्प है।